एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में फिर लापरवाही के आरोप: घायल के स्वजन का दावा- 2 घंटे तक बहता रहा खून, डॉक्टर-स्टाफ पर टालमटोल का आरोप; अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई
भोपाल: राजधानी के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज में कथित लापरवाही और मनमानी का एक नया मामला सामने आया है। सड़क हादसे में पैर की नस डैमेज होने और दो जगह फ्रैक्चर होने के बावजूद घायल को समय पर इलाज न मिलने का आरोप स्वजनों ने लगाया है। विवाद बढ़ने के बाद स्वजन रात में ही घायल को निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इलाज के पुख्ता रिकॉर्ड होने की बात कही है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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स्वजनों के गंभीर आरोप: हादसे में घायल युवक के भाई मोहम्मद अमान अहमद का आरोप है कि रात करीब 1:15 बजे घायल को हमीदिया अस्पताल लाया गया, लेकिन दो घंटे तक उसे डॉक्टर और स्टाफ के बीच चक्कर कटवाए गए। पैर से लगातार खून बहने और गंभीर चोट (दो फ्रैक्चर और नस डैमेज) होने के बावजूद ड्रेसिंग तक नहीं की गई। विरोध करने पर घायल को अन्यत्र ले जाना पड़ा।
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ऑटो पलटने से हुआ था हादसा: घटना के अनुसार, रात करीब एक बजे शहीद नगर चौराहे पर अचानक कुत्ता सामने आ जाने से ऑटो पलट गया था, जिसकी चपेट में आने से चालक का छोटा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया था। रात 2:45 बजे स्वजन उसे मजबूरन निजी अस्पतालों में ले गए।
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अस्पताल अधीक्षक की सफाई: हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने स्वजनों के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में ब्लड इन्वेस्टिगेशन, इंजेक्शन और उपचार का पूरा विवरण दर्ज है।
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भीड़ और प्राथमिकता का तर्क: अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि हमीदिया की इमरजेंसी में रोजाना औसतन 350 मरीज आते हैं, जबकि वहां लगभग 40 बेड ही उपलब्ध हैं। मरीजों की मेडिकल कंडीशन की गंभीरता (ट्राइएज) के आधार पर उन्हें प्राथमिकता देना आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था का हिस्सा है।




