जबलपुर/भोपाल: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दायर मानहानि के मामले में निचली अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राहुल गांधी ने विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए जारी किए गए समन को रद्द करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद एक चुनावी रैली के दौरान दिए गए बयान से शुरू हुआ था:
-
आरोप: राहुल गांधी ने एक जनसभा में कथित तौर पर मुख्यमंत्री (तत्कालीन) के परिवार का नाम ‘पनामा पेपर्स’ घोटाले और अन्य अनियमितताओं से जोड़ा था।
-
मानहानि का दावा: कार्तिकेय चौहान ने इन आरोपों को निराधार और छवि खराब करने वाला बताते हुए राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) का मुकदमा दर्ज कराया।
-
समन: इस मामले में संज्ञान लेते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
हाईकोर्ट में राहुल गांधी की दलीलें
राहुल गांधी की ओर से पेश कानूनी टीम ने हाईकोर्ट में तर्क दिया है कि:
-
निचली अदालत द्वारा समन जारी करने की प्रक्रिया में कानूनी खामियां हैं।
-
जो बयान दिया गया था, उसका गलत संदर्भ निकाला गया है।
-
उनके खिलाफ यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है, इसलिए समन को निरस्त किया जाना चाहिए।
कार्तिकेय चौहान का पक्ष
दूसरी ओर, कार्तिकेय चौहान के वकीलों का कहना है कि सार्वजनिक मंच से बिना तथ्यों के किसी के चरित्र पर कीचड़ उछालना दंडनीय अपराध है। उनका तर्क है कि कानून सबके लिए बराबर है और राहुल गांधी को अदालत की प्रक्रिया का सामना करना चाहिए।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं—क्या राहुल गांधी को व्यक्तिगत पेशी से छूट मिलेगी या उन्हें ट्रायल कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा?
प्रमुख बिंदु (Quick Highlights):
-
मामला: आपराधिक मानहानि (धारा 499/500 IPC)।
-
पक्ष: राहुल गांधी (याचिकाकर्ता) बनाम कार्तिकेय सिंह चौहान (परिवादी)।
-
अदालत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर)।
-
विवाद का केंद्र: चुनावी रैली में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप।




