मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संकट बन गया है। इस वायरस से बाघिन और तीन शावकों का पूरा कुनबा खत्म …और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
- कान्हा टाइगर रिजर्व में सीडीवी संक्रमण से अब तक पांच बाघों की मौत
- एनटीसीए ने कुत्तों के टीकाकरण और स्वास्थ्य निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश
- प्रदेश में जनवरी से अब तक 33 बाघों की मौत, वन विभाग अलर्ट मोड पर
भोपाल। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) गंभीर खतरा बन गया है।
कुत्तों से फैलने वाले इस वायरस की चपेट में आने से अब तक पांच बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें एक बाघिन और उसके तीन शावक शामिल हैं, जबकि हाल ही में एक अन्य बाघ की भी मौत हुई है।
इस मामले ने न केवल कान्हा पार्क प्रबंधन बल्कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की चिंता भी बढ़ा दी है। संक्रमण को रोकने के लिए एनटीसीए ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
नियमित जांच के निर्देश
एनटीसीए ने निर्देश दिए हैं कि टाइगर रिजर्व और उसके आसपास रहने वाले कुत्तों का नियमित टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बाघ अभयारण्यों में सक्रिय और निष्क्रिय रोग निगरानी प्रणाली को मजबूत करने तथा जंगली मांसाहारी जीवों की नियमित स्वास्थ्य जांच करने को कहा गया है।
टीकाकरण के बावजूद बाघों में वायरस संक्रमण
बता दें कि इस वायरस से बचाव के लिए प्रतिवर्ष जंगल व गांव के समीप विचरण करने वाले कुत्तों का टीकाकरण किया जाता रहा है। इसके बाद भी कान्हा में इस वायरस की चपेट में बाघों के आने से वन अमले की नाकामी सामने आ रही है।
कारण यह है कि एनटीसीए की चेतावनी में अभयारण्यों और अन्य बाघ आवासों के आसपास कुत्तों के टीकाकरण को आवश्यक बताया गया है। इसके बावजूद कान्हा में संक्रमण फैलना चिंता का विषय बन गया है।
उल्लेखनीय है कि जनवरी से अब तक मध्य प्रदेश में 33 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें कई मामलों में शिकार की घटनाएं भी सामने आई हैं।
बाघों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए उपाय किए गए हैं। एहतियात बरतते हुए कुत्तों को टाइगर रिजर्व सीमा से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं। कुत्तों का टीकाकरण भी कराने पर जोर है। अन्य टाइगर रिजर्व में भी सतर्कता बरती जा रही है।- डॉ. समीता राजौरा, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र वन।




