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Cockroach Janata Party: कॉकरोच इज बैक… पहले अकाउंट पर रोक के बाद की दमदार वापसी, 1 घंटे में 25 हजार फॉलोअर्स

 

Cockroach Janata Party: सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाले  ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक ने इंटरनेट पर अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है. भारतीय सरकार के कानूनी आदेश के बाद माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) ने इस ग्रुप के मेन अकाउंट को देश में ब्लॉक कर दिया था. इस डिजिटल कार्रवाई के तुरंत बाद इसके क्रिएटर ने ‘कॉकरोच इज बैक’ (@Cockroachisback) नाम से एक नया हैंडल एक्टिव कर लिया है.

‘कॉकरोच कभी मरते नहीं’ के नारे से वापसी

नए अकाउंट के प्रोफाइल बायो में एक बेहद दिलचस्प और कड़ा संदेश लिखा गया है- “कॉकरोचेस डोंट डाई!” (कॉकरोच कभी मरते नहीं). इस मुहिम के पीछे मुख्य दिमाग माने जाने वाले पॉलिटिकल स्ट्रेटजिस्ट अभिजीत दीपके ने यह कदम तब उठाया, जब भारत सरकार के निर्देश का पालन करते हुए ‘एक्स’ ने आंदोलन के मुख्य हैंडल (@CJP_2029) को देश के अंदर पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था. सरकार के इस एक्शन के कुछ ही घंटों के भीतर इस डिजिटल ग्रुप ने नया प्लेटफॉर्म तैयार कर अपनी मौजूदगी दोबारा दर्ज करा दी.

बीजेपी और कांग्रेस को दी थी कड़ी टक्कर

सरकार की इस कानूनी कार्रवाई से ठीक पहले इस ग्रुप ने सोशल मीडिया की दुनिया में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया था. इंस्टाग्राम पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के अचानक लगभग 14 मिलियन (1.4 करोड़) फॉलोअर्स हो गए थे. फॉलोअर्स के इस विशाल आंकड़े के साथ इस पेज ने देश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी (BJP) के आधिकारिक हैंडल को भी पीछे छोड़ दिया था और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (INC) के बराबर आ खड़ा हुआ था. खबर लिखे जाने तक Cockroach is Back के एक घंटे में एक्स पर 25 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. इसे बनाने वाले सूत्रधार अभिजीत दीपके ने अपने निजी प्रोफाइल से एक्स अकाउंट के ब्लॉक होने की जानकारी दी थी. लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने बैकअप के तौर पर एक नया हैंडल बना दिया.

चीफ जस्टिस के बयान से शुरू हुआ पूरा विवाद

इंटरनेट पर तूफान खड़ा करने वाली इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का गठन 16 मई को हुआ था. दरअसल, यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा की गई एक तल्ख टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ था. फर्जी डिग्री के एक मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने डिजिटल एक्टिविज्म (इंटरनेट पर सक्रियता) से जुड़े कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया था.

बयान पर दी सफाई पर युवाओं का गुस्सा

हालांकि, विवाद बढ़ता देख मुख्य न्यायाधीश ने बाद में इस पर सफाई भी दी थी. उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और उनकी टिप्पणी सिर्फ फर्जी डिग्री के सहारे काम करने वाले धोखेबाज पेशेवरों के खिलाफ थी. इसके बावजूद, देश के नाराज और हताश युवाओं ने इस शब्द को सरकार और व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े हथियार में बदल दिया. खुद को ‘आलसी और बेरोजगारों की आवाज’ बताने वाले इस व्यंग्यात्मक मंच को उन युवाओं का भारी समर्थन मिला, जो नौकरी की कमी और बार-बार होने वाले पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.

कॉकरोच जनता पार्टी ने जारी किया घोषणा पत्र

इस अनोखे आंदोलन ने सोशल मीडिया पर काफी आक्रामक रुख अपना रखा है और अपना एक 5 सूत्रीय घोषणापत्र (मैनिफेस्टो) भी जारी किया है. इस घोषणापत्र के जरिए न्यायपालिका में पूरी पारदर्शिता लाने और जजों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले राजनीतिक फायदों व पदों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है. इस मुहिम की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक इंटरनेट के जरिए 3,50,000 (साढ़े तीन लाख) से अधिक लोग इस पार्टी के आधिकारिक सदस्य के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं.

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