एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / प्रशासनिक डेस्क
मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का सख्त फरमान: बिना सूक्ष्म परीक्षण के भेजी गई फाइलें होंगी सीधे नस्तीबद्ध (रिजेक्ट); प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख
भोपाल: मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के लिए एक बेहद कड़ा और स्पष्ट निर्देश जारी किया है। जीएडी ने प्रदेश के सभी विभागों, विभागाध्यक्षों (HoDs) और जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि अब से बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के पालन और अपने स्तर पर फाइलों का समुचित परीक्षण किए बिना सीधे भेजे गए प्रकरणों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। यदि फाइलें नियमों के तहत नहीं पाई गईं, तो उन पर कोई पत्राचार करने के बजाय उन्हें सीधे नस्तीबद्ध (रिजेक्ट) कर दिया जाएगा।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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बिना परीक्षण वाली फाइलें होंगी नस्तीबद्ध: जीएडी के अवर सचिव रवि मालवीय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विभिन्न विभाग पहले से उपलब्ध स्पष्ट नियमों और परिपत्रों का पालन किए बिना, तथा अपने स्तर पर फाइलों का सूक्ष्म परीक्षण और स्व-विवेक का उपयोग किए बगैर सीधे प्रकरण जीएडी को भेज रहे हैं। अब ऐसा करने पर फाइलों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और उन्हें खारिज कर दिया जाएगा।
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फाइलों में पाई गई गंभीर प्रशासनिक त्रुटियां: जीएडी ने फाइलों के संचालन में हो रही कई लापरवाहियों को रेखांकित किया है:
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जिला कार्यालय और विभागाध्यक्ष सीधे जीएडी से पत्राचार कर रहे हैं।
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फाइलों के साथ व्यवस्थित संक्षेपिका (Brief) संलग्न नहीं की जा रही है, और यदि होती भी है, तो यह स्पष्ट नहीं होता कि वास्तव में किस बिंदु पर मार्गदर्शन चाहिए।
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कई प्रकरण विभागों के प्रमुख सचिव या सचिव के अनिवार्य अनुमोदन के बिना ही आगे बढ़ा दिए जाते हैं।
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न्यायालयीन (कोर्ट) मामलों में विधि विभाग से आधिकारिक सलाह लेने के बजाय फाइलें सीधे जीएडी को भेजी जा रही हैं।
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परामर्शदात्री समितियों की बैठकें अनिवार्य: इसके अलावा, जीएडी ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि कई विभागों द्वारा संयुक्त परामर्शदात्री समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जा रही हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि हर तीन महीने में यानी साल में कम से कम चार बार ये बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएं। साथ ही सक्षम अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र के मामलों का त्वरित निराकरण करने और बैठकों की कार्यवाही का पूरा विवरण जीएडी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।




