एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / शिक्षा एवं विधिक डेस्क
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवा मान्य होने पर पुरानी पेंशन (OPS) से वंचित नहीं किया जा सकता; 99 हजार शिक्षकों को मिल सकती है बड़ी राहत
भोपाल: पुरानी पेंशन बहाली को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे मध्य प्रदेश के शिक्षकों के लिए हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अदालत ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि जब सरकार शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवाओं को पूरी तरह मान्य करते हुए उन्हें क्रमोन्नति (Time-bound Promotion) और वरिष्ठता (Seniority) का लाभ दे रही है, तो उन्हें पुरानी पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने वर्ष 2018 में ‘संवर्ग संविलियन’ (Cadre Merger) को नई नियुक्ति मानने वाली सरकार की दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता शिक्षिका करुणा शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एनपीएस (NPS) फंड को ओपीएस (OPS) फंड में स्थानांतरित करने का भी निर्देश दिया है।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
-
सरकार की दलील खारिज: मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त होने वाले कर्मचारियों पर नई पेंशन योजना (NPS) अनिवार्य की गई थी। सरकार का तर्क था कि चूंकि इन शिक्षकों का संविलियन 2018 के नियमों के तहत हुआ है, इसलिए उनकी नियुक्ति तिथि 2005 के बाद की मानी जाएगी और वे पुरानी पेंशन के पात्र नहीं हैं। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
-
99 हजार से अधिक शिक्षकों पर असर: मध्य प्रदेश में कुल लगभग पौने चार लाख शिक्षक हैं, जिनमें से 1998 से 2005 के बीच नियुक्त 99 हजार से अधिक अध्यापक और शिक्षक शामिल हैं। इन सभी की मूल नियुक्तियां शिक्षाकर्मी के रूप में 1998, 2001 या 2003 के दौरान हुई थीं।
-
एनपीएस से ओपीएस फंड ट्रांसफर का आदेश: अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि इन शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति वर्ष 2005 से पहले की है और सरकार उनकी उस पुरानी सेवा को वरिष्ठता व क्रमोन्नति के लिए जोड़ रही है, तो पेंशन के मामले में भी वही नियम लागू होगा। कोर्ट ने एनपीएस खाते की राशि को पुरानी पेंशन फंड में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।




