मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद लागू हुए इस फैसले से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के 4.5 लाख से अधिक पेंशनरों को राहत मिलने का रास्ता आसान होगा।

प्रतीकात्मक फोटो, एआई से तैयार की गई है।
HighLights
- दोनों राज्याें ने एक-दूसरे की सहमति लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है
- अपनी-अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार महंगाई राहत बढ़ाने का निर्णय स्वयं ले सकेंगे
- एमपी और छत्तीसगढ़ के 4.5 लाख से अधिक पेंशनरों को मिलेगी राहत
भोपाल । मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साढ़े चार लाख से अधिक पेंशनरों को महंगाई राहत में वृद्धि के लिए अब दोनों राज्यों को एक-दूसरे की सहमति नहीं लेनी होगी। दोनों राज्य अपनी वित्तीय स्थिति को देखते हुए निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।
इस संबंध में दोनों राज्यों ने 26 साल पुरानी सहमति की अनिवार्यता संबंधी व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय शुक्रवार 17 जुलाई को लेकर लागू भी कर दिया।
नईदुनिया की खबर पर लगी मुहर
नईदुनिया ने 12 जून 2026 को ही बता दिया था कि महंगाई राहत बढ़ाने के लिए सहमति का प्रावधान हटेगा। वर्ष 2000 में जब मध्य प्रदेश से विभाजित होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना तब राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 में वित्तीय मामलों में दोनों राज्यों की सहमति का प्रावधान रखा गया। पेंशनरों के मामले में यह निर्धारित हुआ कि 76 प्रतिशत वित्तीय भार मध्य प्रदेश और 24 प्रतिशत छत्तीसगढ़ उठाएगा।
यह प्रावधान 2000 के पहले के कर्मचारियों के संदर्भ में था। इसके कारण जब भी केंद्र सरकार पेंशनरों की महंगाई राहत में वृद्धि करती तो कभी मध्य प्रदेश तो कभी छत्तीसगढ़ पत्र लिखकर दूसरे राज्य से अपने पेंशनरों को इसका लाभ देने के लिए सहमति मांगते थे। राज्य अपनी वित्तीय स्थिति को देखकर निर्णय लेती थीं। जबकि, इसकी आवश्यकता ही नहीं थी क्योंकि फार्मूला तय है और राशि आज नहीं तो कल देनी ही है।
सीएम की पहल पर हुआ सुधार
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने व्यवस्था में सुधार की पहल की। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी के निर्देश पर विभाग ने छत्तीसगढ़ को प्रस्ताव भेजा। शुक्रवार 17 जुलाई को इस पर बात बन गई और छत्तीसगढ़ के वित्त सचिव रोहित यादव और मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव वित्त के हस्ताक्षर से वित्त विभाग ने आदेश जारी कर दिए।
इसके अनुसार महंगाई राहत में वृद्धि के लिए विधायी संशोधन के स्थान पर प्रशासकीय आदेश जारी करेंगे। वृद्धि के आदेश से पड़ने वाले वित्तीय भार के संबंध में दोनों राज्य एक-दूसरे को सूचना भेजेंगे। कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत से अधिक दर पर घोषित नहीं करेगा।
पेंशनरों के हित में निर्णय
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने दोनों राज्यों द्वारा लिए गए इस निर्णय को पेंशनरों के हित में बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 2025 में हाई कोर्ट जबलपुर में इस संबंध में दायर याचिका में कह चुकी है कि दोनों राज्य चाहें तो सहमति के झंझट से मुक्ति पा सकते हैं मगर इसके लिए सहमति अनिवार्य है। यह अब बन गई है।




