एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में कमजोर पड़ा मानसूनी सिस्टम: 15 सितंबर से बारिश में आई कमी; पूर्वी हिस्से में बंपर बारिश, तो पश्चिमी जिलों में अब भी घाटा बरकरार
भोपाल: मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से पश्चिमी जिलों (भोपाल, इंदौर, उज्जैन, चंबल और नर्मदापुरम) में सक्रिय रहा मानसूनी दौर अब कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार (15 सितंबर) से बारिश का सिस्टम कमजोर हो गया है, जिसके चलते अब अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में केवल हल्की बारिश की ही संभावना है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड बारिश, पश्चिमी हिस्सा तरसा: इस मानसूनी सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्सों—जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग—में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। इसके उलट, पश्चिमी हिस्सों में बारिश का आंकड़ा अनुमान के मुताबिक काफी कम रहा है।
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इन जिलों में सबसे ज्यादा सरप्लस (अधिक) बारिश: मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 23 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं। सागर के निवाड़ी में कोटे से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34% और मैहर में 29% तक अधिक पानी गिरा है।
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32 जिलों में अभी भी कम बारिश: दूसरी ओर, प्रदेश के कई पश्चिमी और अन्य जिलों में औसत से 2% से लेकर 49% तक कम पानी बरसा है। इनमें आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं। इसके अलावा बालाघाट, छिंडवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला और सिवनी जैसे जिलों में भी सामान्य से 2% से 25% तक कम बारिश दर्ज की गई है।
पिछले एक सप्ताह में सुधरे आंकड़े
पिछले एक सप्ताह के दौरान हुई अच्छी बारिश और कई जिलों में बने बाढ़ जैसे हालातों के कारण बारिश के कुल आंकड़ों में काफी सुधार जरूर हुआ है। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों के मामले में बेहतर स्थिति में नजर आया है, हालांकि सोमवार तक कुल आंकड़ा माइनस में एक प्रतिशत दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दो दिनों तक सिस्टम कमजोर रहने से केवल छिटपुट बौछारें ही देखने को मिलेंगी।




