भोपाल | मध्य प्रदेश सरकार की साल 2028 तक ढाई लाख पदों पर भर्ती करने की महत्वाकांक्षी योजना वर्तमान में कानूनी और प्रशासनिक उलझनों में फंसी नजर आ रही है। प्रदेश में पिछले 8 सालों से रुकी हुई पदोन्नति (Promotion) नई भर्तियों के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन गई है, जिससे न केवल सेवारत कर्मचारी बल्कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवा भी प्रभावित हो रहे हैं।
पदोन्नति नियम 2025: हाई कोर्ट में फैसला सुरक्षित
भर्तियों में आ रही देरी की मुख्य वजह पदोन्नति नियम 2025 पर जारी कानूनी विवाद है।
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जबलपुर हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 17 फरवरी को ही पूरी हो चुकी है।
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फिलहाल कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। जब तक कोर्ट का निर्णय नहीं आता, सरकार पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रही है, जिससे ऊपर के पद खाली नहीं हो रहे हैं।
भर्ती प्रक्रिया पर कैसे पड़ रहा है असर?
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की योजना के अनुसार, प्रमोशन होने से जो पद रिक्त होते, उन पर नई नियुक्तियां की जानी थी।
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सीमित भर्ती: वर्तमान में केवल उन्हीं पदों पर भर्ती हो पा रही है जो नए स्वीकृत हैं (जैसे- पुलिस आरक्षक, शिक्षक और स्वास्थ्य कर्मी)।
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पद रिक्त नहीं: प्रमोशन रुकने से पुराने कर्मचारी रिटायर तो हो रहे हैं, लेकिन पदानुक्रम (Hierarchy) के अनुसार नीचे के पद खाली नहीं हो पा रहे हैं।
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एरियर और वरिष्ठता: 8 सालों से पात्रता रखने के बावजूद कर्मचारी बिना पदोन्नति के रिटायर हो रहे हैं, जिससे कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश है।
अस्थायी समाधान: फिर शुरू हुई ‘प्रभार’ व्यवस्था
कामकाज प्रभावित होता देख राजस्व और गृह विभाग जैसे कुछ महकमों ने एक बार फिर ‘उच्च पद का प्रभार’ देना शुरू कर दिया है।
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मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक के अनुसार, नियमों को अखिल भारतीय सेवा संवर्ग के समान बनाया जाता तो यह उलझन पैदा ही नहीं होती।
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प्रभार देने से काम तो चल रहा है, लेकिन कर्मचारियों को स्थायी पदोन्नति और उसके लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
आगे क्या?
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी तैयारी पूरी है। जैसे ही हाई कोर्ट का निर्णय आता है, चरणबद्ध तरीके से पदोन्नति और फिर रिक्त पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा।




