एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों पर कसेगा शिकंजा: कानून की बजाय अब नियम लाएगी सरकार; 16 साल से कम उम्र के प्रवेश पर रोक और 5 घंटे से अधिक पढ़ाई पर पाबंदी
भोपाल: देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों में होने वाले हादसों और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब कोचिंग संस्थानों को विनियमित (Regulate) करने के लिए नया कानून बनाने के स्थान पर नियम (Rules) लागू करने जा रही है। इसमें भारत सरकार द्वारा सुझाए गए सभी सुरक्षात्मक और शैक्षणिक प्रावधानों को शामिल किया जाएगा, जिससे मनमानी करने वाले संस्थानों पर लगाम लग सकेगी।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कानून की जगह नियम क्यों?: उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, कानून बनाने और उसे लागू करने की प्रक्रिया में लंबी कागजी कार्रवाई और समय लगता है। इसलिए, प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए नियमों के जरिए ही सभी कोचिंग संस्थानों को विनियमित किया जाएगा।
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16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों के प्रवेश पर रोक: वर्तमान में कम उम्र (12-13 साल) के बच्चों को कोचिंग में झोंक दिया जाता है, जिससे वे मानसिक तनाव का शिकार होते हैं। नए नियमों के तहत 16 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों को कोचिंग में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही, संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी रखनी होगी।
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रोजाना सिर्फ 5 घंटे पढ़ाई: कोचिंग संस्थानों में बच्चों को सुबह से देर रात तक बैठाए रखने और घंटों पढ़ाने पर रोक लगा दी गई है। अब किसी भी छात्र को दिन में 5 घंटे से अधिक नहीं पढ़ाया जाएगा। बीच में कोर्स छोड़ने पर आनुपातिक (Pro-rata) आधार पर फीस भी लौटानी होगी।
अन्य प्रमुख प्रावधान और जुर्माने की व्यवस्था
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अनिवार्य पंजीयन और फायर सेफ्टी: कोई भी कोचिंग संस्थान बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित नहीं हो सकेगा। इसके लिए भवन अनुज्ञा, फायर सेफ्टी एक्ट का पालन और पर्याप्त बैठक व्यवस्था अनिवार्य होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार में 25 हजार रुपये और दोबारा ऐसा करने पर 1 लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकेगा।
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शिक्षकों की योग्यता सार्वजनिक होगी: संस्थान को अपने शिक्षकों की योग्यता (कम से कम स्नातक) और पूरा ब्योरा अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा। किसी भी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को अध्यापन कार्य के लिए नहीं रखा जा सकता।
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भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: कोचिंग संस्थान अब ‘100% चयन की गारंटी’ या इसी तरह के अन्य अतिशयोक्तिपूर्ण और भ्रामक विज्ञापन नहीं दे सकेंगे।
उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने स्पष्ट किया है कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अब नियमों के माध्यम से ही कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा।




