एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में ‘ड्रोन दीदियों’ का कमाल: खेतों में उर्वरक छिड़काव से महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर, अब बनेगी ‘ड्रोन दीदी बटालियन’
भोपाल: कभी ड्रोन का नाम सुनकर डरने वाली ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक के सहारे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। मध्य प्रदेश में ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के तहत प्रशिक्षित महिलाएं खेतों में ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं। शानदार कमाई और भारी मांग को देखते हुए अब राज्य आजीविका मिशन ‘ड्रोन दीदी बटालियन’ बनाने जा रहा है, जिसके तहत 700 से अधिक महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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लाखों की कमाई और भारी मांग: प्रदेश के विभिन्न जिलों में काम कर रही ड्रोन दीदियों ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण महिलाएं तकनीक को अपनाने में किसी से पीछे नहीं हैं। खेतों में ड्रोन छिड़काव की मांग इतनी अधिक है कि कई जगहों पर किसानों को 8 से 10 दिनों तक की वेटिंग मिल रही है। ड्रोन दीदियां प्रति एकड़ लगभग 400 रुपये शुल्क लेती हैं और अब तक कई महिलाएं 6 लाख से लेकर 12 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर चुकी हैं।
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700 से अधिक महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण: मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ विनय निगम के अनुसार, पहले चरण में सीएसआर फंड के जरिए 89 महिलाओं को ड्रोन दिए गए थे, जो सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। अब दूसरे चरण में ‘ड्रोन दीदी बटालियन’ के तहत 700 से अधिक महिलाओं को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें योजना के तहत ड्रोन उपलब्ध कराने में मदद की जाएगी।
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आधुनिक परिवहन सुविधा: महिलाओं को ड्रोन के साथ बैटरी चलित इलेक्ट्रिक वाहन भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उन्हें ड्रोन और आवश्यक सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में आसानी होती है।
प्रेरणादायक सफलता की कहानियां
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वंदना केवट (सिलवानी, रायसेन): एमबीए और एमएसडब्ल्यू तक शिक्षा प्राप्त वंदना स्वसहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ीं। साल 2024 में ड्रोन मिलने और डीजीसीए (DGCA) का लाइसेंस प्राप्त करने के बाद, वह अब तक 12 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी हैं। उनके पास भी काम की भारी मांग के कारण 4 से 5 दिन की वेटिंग रहती है।
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रोशनी यादव (सतना): स्नातक तक पढ़ी रोशनी ने 15 दिन के प्रशिक्षण के बाद ड्रोन चलाना सीखा। एप के जरिए किसानों की बुकिंग होती है और वे अब तक लगभग 8 लाख रुपये की कमाई कर चुकी हैं।
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सपना काछी (जबलपुर) और कविता चौहान (हरसूद): दसवीं पास सपना काछी (6 लाख रुपये तक की आय) और कविता चौहान (4,500 एकड़ में छिड़काव कर 9 लाख रुपये की कमाई) जैसी महिलाएं आज ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं।




