एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा तंत्र लाचार: अमले की कमी और अधूरी लैब के कारण भोपाल पर बढ़ा बोझ, महीनों में आ रही मिलावट की जांच रिपोर्ट
भोपाल: हमारी थाली में परोसा जाने वाला भोजन असली है या मिलावटी, इसकी शुद्धता परखने वाला प्रशासनिक तंत्र खुद भारी चुनौतियों से जूझ रहा है। प्रदेशभर में खाद्य नमूनों की जांच के लिए केवल भोपाल की प्रयोगशाला पर अत्यधिक दबाव होने के कारण जांच रिपोर्ट आने में हफ्तों नहीं बल्कि महीनों का समय लग रहा है, जिसका सीधा फायदा मिलावटखोरों को मिल रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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अकेली भोपाल लैब का बोझ: प्रदेशभर से हर महीने लगभग 3,000 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए जाते हैं, लेकिन इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर की नई प्रयोगशालाएं तैयार न होने के कारण सारा दबाव अकेले भोपाल स्थित लैब पर है।
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अधिकारियों की भारी कमी: भोपाल को छोड़कर ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर संभाग, सागर और नर्मदापुरम समेत अन्य जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पदों की भारी कमी है, जिससे बाजारों की नियमित निगरानी प्रभावित हो रही है।
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दिसंबर 2026 तक मिलेंगे नए अधिकारी: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के जरिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 123 पदों पर भर्ती की चयन सूची जारी हो चुकी है, जिनकी सेवाएं दिसंबर 2026 तक मिलने की उम्मीद है।
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लागत और लाइसेंस: खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत सब्जी विक्रेता, ढाबे से लेकर बड़े होटलों तक सभी के लिए लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन मैदानी अमले की कमी के कारण सख्ती से पालन कराना मुश्किल हो रहा है।
लैब और भर्ती की वर्तमान स्थिति
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लैब की स्थिति: इंदौर में नई लैब की इमारत और मशीनें तैयार हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते वहां अभी जांच शुरू नहीं हो सकी है, जबकि ग्वालियर और जबलपुर में लैब का निर्माण कार्य अब तक चल रहा है।
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भर्ती के आंकड़े: 123 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में अनारक्षित वर्ग के लिए 40, ओबीसी के लिए 38, एसटी के लिए 18, एससी के लिए 17 और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 पद आरक्षित हैं, जिनकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक के अनुसार, अन्य जिलों से आने वाले सभी नमूनों की जांच फिलहाल भोपाल लैब में ही की जा रही है, और नए अधिकारियों की नियुक्ति के बाद व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद है।




