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MP में ढाई साल में धरातल पर आया 8.63 लाख करोड़ का निवेश, अब रक्षा उत्पादों और आईटी का बनेगा हब

 

भोपाल। मध्य प्रदेश में ढाई साल की डॉ. मोहन यादव सरकार में 32.95 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, इसमें से 8.63 लाख यानी (28 प्रतिशत) निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरे। इनसे लाखों युवाओं के लिए रोजगार भी सृजित हुए हैं।

अब मध्य प्रदेश रक्षा उत्पाद और आईटी का हब बनने की ओर अग्रसर है। दो माह पूर्व ही अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के ग्वालियर प्लांट ने भारतीय सेना को 7.62 एमएम की 2,000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन की पहली खेप डिलीवर की है।

 

रक्षा क्षेत्र में निवेश पर प्रोत्साहन से लेकर रक्षा उत्पादों के निर्यात में भी राज्य सरकार सहायता दे रही है। स्टार्टअप और रक्षा उत्पाद की कोई बेहतर तकनीक को प्रोत्साहित किया जा रहा है। निर्यात के लिए उत्पाद परीक्षण को सरल कर इसकी शुल्क सीमा भी घटा दी गई है। किसी व्यक्ति के पास किसी नए रक्षा उत्पाद का आइडिया है तो चयन होने पर उसे 25 करोड़ रुपये तक की सहायता बतौर प्रोत्साहन दी जाएगी।

500 से ज्यादा आईटी कंपनियां काम कर रही

इसी तरह प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में आईटी पार्क डेवलप किए जा रहे हैं। भोपाल में मौजूदा आईटी पार्कों का विस्तार कर इसे देश का सबसे बड़ा मेगा एआइ और नॉलेज सिटी भी बनाया जा रहा है। इंदौर में आइटी पार्क के लिए भूमि आरक्षित की गई है।

मध्य प्रदेश में वर्तमान में 1,200 से अधिक टेक स्टार्टअप्स और लगभग 500 से अधिक छोटी-बड़ी आईटी कंपनियां काम कर रही हैं। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के अनुसार, प्रदेश में 50 से अधिक प्रमुख, बड़ी आईटी कंपनियां सक्रिय रूप से स्थापित हैं।

हिंदुस्तान शिपयार्ड, बीईएल और जेबीएम जैसे समूहों ने दिखाई रुचि

भारत में इस वर्ष डेढ़ लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 23 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। आगामी तीन वर्ष में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। भारत सरकार की योजना के तहत रक्षा उत्पाद बनाने के लिए तीन से पांच साल अनुभव की अनिवार्यता नहीं होगी। नवाचार या तकनीक अच्छी है तो उसे विशेष मामला मानकर प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश में रक्षा उत्पादन के लिए अदाणी डिफेंस, हिंदुस्तान शिपयार्ड, बीईएल और जेबीएम जैसे समूहों ने रुचि दिखाई है।

रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक

सागर, कटनी, रतलाम, सतना और मुरैना सहित आठ जिलों में रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक उपलब्ध है। भौगोलिक स्थिति और सहयोगी इको सिस्टम के कारण मध्य इसके लिए सबसे उपयुक्त राज्य है। धार के पीएम मित्रा पार्क में भी रक्षा क्षेत्र से जुड़े निवेश प्रस्ताव बुलाए गए हैं। सरकार की निवेश नीतियों के तहत डीपीआर बनाकर निवेशकों को इकाई लगाने तुरंत जमीन दी जाएगी।

जबलपुर में व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री जैसे रक्षा इको सिस्टम पहले से मौजूद हैं। व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के टैंकों की रिपेयरिंग की क्षमता बढ़ाई जाएगी। यहां भारतीय सेना के टी-90 और टी-72 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों की ओवरहालिंग शुरू हो गई है। जबलपुर, इटारसी और कटनी में आर्डनेंस फैक्ट्री हैं। ग्वालियर और इंदौर के नजदीक महू में फायरिंग रेंज है। राज्य के चारों ओर रक्षा क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

कटनी-जबलपुर में डिफेंस कॉरिडोर की संभावनाएं

प्रदेश में अब कटनी, जबलपुर, इटारसी और सागर के बीच डिफेंस कारिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर रक्षा क्षेत्र में हर साल 400 करोड़ रुपये तक की स्थानीय आपूर्ति कर सकता है। महाकोशल क्षेत्र में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) हब इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन का जबलपुर में उत्पादन शुरू करने की तैयारी

जबलपुर के आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) में उन्नत एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन का उत्पादन फिर से शुरू करने की तैयारी है। यह अब आधुनिक इलेक्ट्रिक ड्राइव, फायर कंट्रोल सिस्टम और रडार से लैस होगी। ऑपरेशन सिंदूर में अपने अचूक निशाने और सटीक प्रदर्शन के चलते एंटी एयरक्राफ्ट गन एल-70 ने गर्व का अहसास कराया।

बताया जा रहा है कि म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआइएल) की एक इकाई ओएफके एल-70 के ट्रायल उत्पादन शुरू करने से पहले इन-हाउस तैयारियों को पुख्ता करने के साथ मंथन में जुटी है। माना जा रहा है कि सेना से रक्षा उत्पादन को हरी झंडी मिलने के बाद कार्य के गति पकड़ने की संभावना है।

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