एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में मामूली बढ़ोतरी: अकुशल कर्मियों के वेतन में सिर्फ 156 रुपये की मासिक वृद्धि; कर्मचारियों में निराशा
भोपाल: देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच मध्य प्रदेश के आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को इस बार वेतन वृद्धि के रूप में काफी कम राहत मिली है। राज्य में आउटसोर्स कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में प्रतिदिन औसतन महज छह रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अकुशल कर्मचारियों का मासिक वेतन पिछले बार की तुलना में काफी कम बढ़ा है, जिससे कर्मचारियों और उनके संघों में निराशा का माहौल है। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रदेशभर में लागू हो चुकी हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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1 अक्टूबर 2026 से लागू नई वेतन दरें:
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अकुशल कर्मचारी: इनका मासिक वेतन 12,428 रुपये से बढ़कर 12,584 रुपये हो गया है (मात्र 156 रुपये की वृद्धि)।
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अर्धकुशल कर्मचारी: इनका वेतन 13,421 रुपये से बढ़कर 13,572 रुपये हुआ है (151 रुपये की मासिक वृद्धि)।
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कुशल कर्मचारी: इनका वेतन 15,144 रुपये से बढ़कर 15,288 रुपये हो गया है (144 रुपये की मासिक वृद्धि)।
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पिछली वृद्धि से तुलना: प्रदेश में पिछली बार न्यूनतम वेतन में 275 रुपये तक की मासिक वृद्धि की गई थी, लेकिन इस बार विभिन्न श्रेणियों में मिलने वाला अतिरिक्त लाभ और भी कम रहा है, जिससे महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों को खास राहत नहीं मिल पा रही है।
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केंद्र सरकार की दरें: तुलनात्मक रूप से देखें तो केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से लागू परिवर्तनीय महंगाई भत्ते में श्रमिकों को 15 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त लाभ दिया है, जिससे वहां अकुशल श्रमिकों का महंगाई भत्ता ही 215 रुपये प्रतिदिन निर्धारित किया गया है।
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कर्मचारी संगठनों की नाराजगी और मांगें:
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आउटसोर्स बिजली कर्मचारी संघ मप्र के प्रदेश अध्यक्ष शिवनारायण राजपूत ने असंतोष जताते हुए कहा कि हरियाणा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी न्यूनतम वेतन कम से कम 21,000 रुपये होना चाहिए था।
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उन्होंने बताया कि नियमों के तहत हर पांच साल में वेतन की समीक्षा होनी चाहिए थी, जो 2019 के बाद सीधे 2024 में हुई, जिससे कर्मचारियों को समय पर उचित लाभ नहीं मिल पाया है। कर्मचारियों ने जोखिम भत्ता दिए जाने की भी मांग उठाई है।
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