एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मेरिट में प्रथम आने के बावजूद नायब तहसीलदार पद से वंचित पटवारी के मामले में पुनर्विचार के निर्देश ग्वालियर/भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सीमित विभागीय परीक्षा में मेरिट सूची में प्रथम स्थान हासिल करने के बावजूद नायब तहसीलदार के पद पर नियुक्ति से वंचित रहे एक पटवारी के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर उसके बरी होने और समान परिस्थिति वाले अन्य मामलों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से विचार करने को कहा है। मुख्य बिंदु (Highlights) परीक्षा में हासिल किया था प्रथम स्थान: प्रमोद कुमार शर्मा वर्तमान में पटवारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (PEB) द्वारा आयोजित सीमित विभागीय परीक्षा में हिस्सा लिया था और 200 में से 152.49 अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में पहला स्थान हासिल किया था। आपराधिक मामले के कारण रुकी थी नियुक्ति: भोपाल की अदालत में एक आपराधिक प्रकरण लंबित होने के कारण उन्हें नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया गया था। इस संबंध में उनकी पूर्व याचिकाएं 2019 और 2024 में खारिज हो चुकी थीं। बवारी के बाद आया नया मोड़: इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 9 अप्रैल 2026 को भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने प्रमोद कुमार शर्मा को संबंधित आपराधिक मामले में पूरी तरह बरी कर दिया। इसके बाद उन्होंने शासन के समक्ष नायब तहसीलदार पद पर नियुक्ति के लिए नया अभ्यावेदन दिया था, जिस पर निर्णय न होने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट की एकलपीठ का निर्देश मामلات की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के आपराधिक मामले में बरी हो जाने के तथ्यों तथा इसी प्रकार की समान परिस्थितियों वाले अन्य व्यक्तियों को नायब तहसीलदार पद पर दी गई नियुक्तियों को संज्ञान में लिया जाए। अदालत के इस निर्देश के बाद अब पटवारी प्रमोद कुमार शर्मा को नियुक्ति मिलने की उम्मीद एक बार फिर जाग गई है।
Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

एमपी में पटवारी के नायब तहसीलदार पद पर नियुक्ति मामले में नया मोड़… हाई कोर्ट ने अभ्यावेदन पर पुनर्विचार करने के दिए निर्देश

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मेरिट में प्रथम आने के बावजूद नायब तहसीलदार पद से वंचित पटवारी के मामले में पुनर्विचार के निर्देश

ग्वालियर/भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सीमित विभागीय परीक्षा में मेरिट सूची में प्रथम स्थान हासिल करने के बावजूद नायब तहसीलदार के पद पर नियुक्ति से वंचित रहे एक पटवारी के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर उसके बरी होने और समान परिस्थिति वाले अन्य मामलों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से विचार करने को कहा है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • परीक्षा में हासिल किया था प्रथम स्थान: प्रमोद कुमार शर्मा वर्तमान में पटवारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (PEB) द्वारा आयोजित सीमित विभागीय परीक्षा में हिस्सा लिया था और 200 में से 152.49 अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में पहला स्थान हासिल किया था।

  • आपराधिक मामले के कारण रुकी थी नियुक्ति: भोपाल की अदालत में एक आपराधिक प्रकरण लंबित होने के कारण उन्हें नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया गया था। इस संबंध में उनकी पूर्व याचिकाएं 2019 और 2024 में खारिज हो चुकी थीं।

  • बवारी के बाद आया नया मोड़: इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 9 अप्रैल 2026 को भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने प्रमोद कुमार शर्मा को संबंधित आपराधिक मामले में पूरी तरह बरी कर दिया। इसके बाद उन्होंने शासन के समक्ष नायब तहसीलदार पद पर नियुक्ति के लिए नया अभ्यावेदन दिया था, जिस पर निर्णय न होने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट की एकलपीठ का निर्देश

मामلات की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के आपराधिक मामले में बरी हो जाने के तथ्यों तथा इसी प्रकार की समान परिस्थितियों वाले अन्य व्यक्तियों को नायब तहसीलदार पद पर दी गई नियुक्तियों को संज्ञान में लिया जाए। अदालत के इस निर्देश के बाद अब पटवारी प्रमोद कुमार शर्मा को नियुक्ति मिलने की उम्मीद एक बार फिर जाग गई है।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply