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एमपी में सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से अटकी 88 दिवंगत शिक्षकों के परिवारों की पेंशन, अनुकंपा राशि की जगह मिल रही रिकवरी की धमकी

 

नए सॉफ्टवेयर आईएफएमएस (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) की गड़बड़ी से मृत शिक्षकों के स्वजन को पेंशन और अनुकंपा वेतन दोनों ही नहीं मिल रहे हैं …और पढ़ें

 

एमपी में सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से अटकी 88 दिवंगत शिक्षकों के परिवारों की पेंशन, अनुकंपा राशि की जगह मिल रही रिकवरी की धमकी

हक के लिए भटक रहे 88 परिवारों के आश्रित। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. एमपी में नया IFMS सॉफ्टवेयर बना मुसीबत
  2. मृत शिक्षकों के परिजनों को न मिल रही पेंशन
  3. हक के लिए भटक रहे 88 परिवारों के आश्रित

भोपाल। मध्य प्रदेश के दिवंगत शिक्षकों के 88 परिवार ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी नहीं बल्कि पांच साल का एकमुश्त वेतन और पेंशन चाहते हैं। लेकिन नए सॉफ्टवेयर आईएफएमएस (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) की गड़बड़ी से मृत शिक्षकों के स्वजन को पेंशन और अनुकंपा वेतन दोनों ही नहीं मिल रहे हैं।

क्या है शिक्षा विभाग का नियम और तकनीकी समस्या?

दरअसल, शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक की मृत्यु के बाद ऐसे परिजन जो शासकीय नौकरी नहीं करना चाहते उन्हें शासन के अन्य विभागों की तरह पांच साल की एकमुश्त राशि दे दी जाती है और कर्मचारी की विधवा को पेंशन दी जाती है। लेकिन शिक्षा विभाग में पेंशन का सॉफ्टवेयर और पांच साल का पैसा देने वाला सॉफ्टवेयर एक कर नया सॉफ्टवेयर आईएफएमएस बनाया गया है जिसके कारण दिवंगत शिक्षकों के आश्रित परिवारों की पात्रता राशि अटकी हुई है।

 

आधी राशि देकर रिकवरी का दबाव

ताजा मामला बालाघाट जिले में वारासिवनी रामपायली के महदुली शासकीय प्राथमिक शाला के सहायक शिक्षक शरद कुमार पारधी का है। पारधी की मृत्यु के उपरांत उनकी पत्नी चित्रलेखा पारधी द्वारा सहमति शपथ पत्र दिया गया कि उन्हें अनुकंपा नियुक्ति के एवज में उनके पुत्र पारस पारधी को शासन द्वारा निर्धारित पांच साल की राशि प्रदान करें।

इसके बाद मृत शिक्षक के मासिक वेतन 31,400 रुपये के बराबर आगामी पांच वर्ष तक होने वाले भुगतान की राशि का 50 प्रतिशत उनके खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन शेष 50 प्रतिशत राशि की मांग करने पर मृतक शिक्षक के पुत्र पर रिकवरी निकालने की बात कही जाने लगी।

डीईओ ने मानी सॉफ्टवेयर की गलती, विभाग को लिखा पत्र

उन्होंने इस मामले से जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को अवगत कराया, डीईओ ने भी माना कि यह गलती नए सॉफ्टवेयर आईएफएमएस के कारण हुई है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग और कोष लेखा संचालनालय को पत्र लिखा है।

आप इस संबंध में आयुक्त लोक शिक्षण से बात करें। बाकी कहां क्या समस्या आ रही है, मैं भी दिखवाता हूं।- संजय गोयल, सचिव, मप्र स्कूल शिक्षा विभाग

नया आइएफएमएस सॉफ्टवेयर बना है, इसमें कुछ समस्या आ रही है। प्रदेशभर में ऐसे 88 प्रकरण हैं। वारासिवनी के प्रकरण को लेकर हमने कोष एवं लेखा संचालनालय को पत्र लिखा है। इसका निराकरण करा लेंगे।- एके उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी बालाघाट

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