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निजी क्षेत्र संभालेंगे सरकारी अस्पताल, ओपन टेंडर से दूर होगी डॉक्टरों की कमी, 5 साल के लिए मिलेगी कमान

 

इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रयोग सफल रहने पर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लाग …और पढ़ें

निजी क्षेत्र संभालेंगे सरकारी अस्पताल, ओपन टेंडर से दूर होगी डॉक्टरों की कमी, 5 साल के लिए मिलेगी कमान

प्रयोग से मरीजों को होगा जमकर फायदा (AI से जनरेट इमेज)

HighLights

  1. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुविधायुक्त बनाने निजी निजी को प्रबंधन सौंपने का होगा प्रयोग
  2. रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चलाया जाएगा पायलट प्रोजेक्ट
  3. मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति पर विचार करने बनाई पांच मंत्रियों की समिति

भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और चिकित्सा संसाधनों की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और नया प्रयोग करने का फैसला लिया है। इसके तहत अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में निजी डाक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था आउटसोर्स (पीपीपी मॉडल) से की जाएगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। इसकी शुरुआत रीवा, गुना और देवास जिलों के 18 सीएचसी से की जाएगी।

क्या है फैसला का उद्देश्य?

इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रयोग सफल रहने पर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। प्रदेश में कुल 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। बैठक में स्वास्थ्य विभाग भी देख रहे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि प्रदेश के सीएचसी में मापदंड के अनुसार विशेषज्ञ डाक्टरों की बेहद कमी है। केवल 75 विशेषज्ञ डाक्टर हैं। इसी तरह मेडिकल आफिसर के 34 प्रतिशत पद रिक्त हैं। जबकि, प्रदेश की 72 प्रतिशत जनसंख्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर है।

 

मंत्रियों ने किया प्रस्ताव का स्वागत

30 बिस्तर के सीएचसी में 41 पद की आवश्यकता होती है। आउटसोर्स के माध्यम से मानव संसाधन की व्यवस्था की जाएगी। एजेंसी का चयन खुली निविदा के माध्यम से होगा। पांच साल के लिए यह व्यवस्था की जाएगी। सूत्रों के अनुसार मंत्रियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए सुझाव दिया कि पहल आदिवासी क्षेत्रों से होनी चाहिए क्योंकि वहां समस्या अधिक है। आउटसोर्स के माध्यम से व्यवस्था के संचालन पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया और वर्तमान स्टाफ की स्थिति को लेकर भी पूछा गया। इस पर अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि जिन जिलों का चयन किया गया है वे विविधतापूर्ण हैं। चूंकि, पायलट प्रोजेक्ट किया जा रहा है इसलिए प्रयास यह है कि एजेंसी आएं। वर्तमान व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति पर निर्णय बाद में

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मध्य प्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 बैठक में प्रस्तुत की। इसमें न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का निवेश, 500 बिस्तर का अस्पताल और नर्सिंग कालेज को प्राथमिकता देना प्रस्तावित किया था। ऐसे निवेशक को रियायती दर पर 60 साल की लीज पर भूमि, उपकरणों पर 50 प्रतिशत अनुदान, बिजली बिल में सात साल की छूट, स्टांप शुल्क में छूट आदि का प्रविधान किया गया।

जब प्रस्ताव पर चर्चा हुई तो सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि इंदौर, भोपाल जैसे शहरों में तो 500 करोड़ रुपये वाले निवेश आ जाएंगे मगर रतलाम में नहीं। हम 200 करोड़ रुपये का निवेश तो करा लेंगे। इसी तरह के कुछ और सुझाव मिले। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन पर और विचार करने के लिए पांच मंत्री राजेंद्र शुक्ल, राकेश सिंह, चेतन्य काश्यप, नरेंद्र शिवाजी पटेल और राधा सिंह की समिति बनाई गई है। समिति की अनुशंसा प्राप्त होने के बाद फिर से बैठक में नीति प्रस्तुत की जाएगी और निर्णय लिया जाएगा।

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