एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश में सूखे का साया: कम बारिश के चलते 11 जिले सूखे की कगार पर; सोयाबीन-मक्का फसलें प्रभावित, पांढुर्णा में किसानों ने रोका सीएम का काफिला
भोपाल: मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी ने अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सामान्य से कम बारिश होने के कारण राज्य के 11 जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं, जिनमें मालवा-निमाड़ और नर्मदापुरम संभाग के प्रमुख इलाके शामिल हैं। इस स्थिति के चलते न केवल खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि आगामी रबी सीजन में सिंचाई और पेयजल संकट का खतरा भी गहराने लगा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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11 जिले सूखे की चपेट में: इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर समेत नौ जिले सीधे तौर पर सूखे के पैमाने पर आ रहे हैं, जबकि शाजापुर और पांढुर्णा की स्थिति भी बेहद गंभीर बनी हुई है। आलीराजपुर में सामान्य से सबसे ज्यादा 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
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किसानों का विरोध और सीएम का हस्तक्षेप: हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांढुर्णा में किसानों ने अपनी सूखी फसलें हाथ में लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला रोक लिया और जिला को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने गाड़ी से उतरकर खुद किसानों की समस्याएं सुनीं।
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फसलों को भारी नुकसान: कम बारिश और नमी की कमी के कारण सोयाबीन, मक्का और मूंग जैसी प्रमुख खरीफ फसलों को भारी क्षति पहुंची है। 2015 के बाद यह पहला मौका है जब प्रदेश में इस तरह के गंभीर हालात बने हैं।
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सूखा घोषित करने की प्रक्रिया: किसी जिले को सूखा घोषित करने के लिए केवल कम बारिश नहीं, बल्कि बोवनी का रकबा, फसल की स्थिति, भूजल स्तर और जलाशयों में पानी की उपलब्धता का आकलन किया जाता है। कलेक्टरों द्वारा भेजी जाने वाली गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर पर समीक्षा की जाती है, जिसके लिए 31 अक्टूबर की समय-सीमा तय है।




