एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश के तीन प्रमुख फोरलेन मार्गों पर टोल वसूली का बड़ा विवाद: 1,360 करोड़ की लागत वाली सड़कों से वसूले जा चुके हैं 6,500 करोड़ से ज्यादा; अब 2038 तक जारी रहेगा टैक्स
भोपाल: मध्य प्रदेश के तीन प्रमुख फोरलेन मार्गों—देवास-भोपाल, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव—पर टोल टैक्स की वसूली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन तीनों सड़क परियोजनाओं की मूल निर्माण लागत मात्र 1,360 करोड़ रुपये थी, लेकिन कंपनियों द्वारा इसके एवज में जून 2025 तक ही 6,522 करोड़ रुपये से अधिक का टोल वसूला जा चुका है। इसके बावजूद संशोधित लागत और नियमों के फेर में अब आम जनता से वर्ष 2033 से लेकर 2038 तक टोल वसूले जाने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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लागत से कई गुना ज्यादा वसूली: मूल लागत महज 1,360 करोड़ रुपये थी, जबकि जून 2025 तक ही 6,522 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली की जा चुकी है।
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संशोधित लागत और बढ़ी हुई समय-सीमा: सरकार द्वारा पेश किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक इन सड़कों की संशोधित परियोजना लागत 7,818.57 करोड़ रुपये हो गई है, जिसके चलते अब वर्ष 2033 से 2038 तक टोल वसूली जारी रहेगी।
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ट्रैफिक में भारी उछाल: देवास-भोपाल मार्ग पर पिछले तीन वर्षों में वाहनों की आवाजाही 35.74 लाख से बढ़कर 52.16 लाख हो गई है, यानी ट्रैफिक में 46% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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गजट नोटिफिकेशन से पहले वसूली का खुलासा: रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भोपाल-बायपास, इंदौर-उज्जैन, सागर-दमोह और महू-घाटाबिल्लोद मार्गों पर आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी होने से महीनों पहले ही अवैध रूप से टोल टैक्स वसूलना शुरू कर दिया गया था।
परियोजनावार वित्तीय और समयावधि का ब्योरा
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देवास-भोपाल मार्ग:
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मूल लागत: ₹345.64 करोड़
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जून 2025 तक वसूली: ₹1,889.51 करोड़ (मूल लागत का 546%)
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संशोधित लागत: ₹1,934.02 करोड़
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टोल वसूली की नई तय अवधि: 21 मई 2033 तक (चेंज ऑफ स्कोप के तहत अवधि बढ़ाई गई)
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जावरा-नयागांव मार्ग:
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मूल लागत: ₹425.71 करोड़
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अब तक वसूली: ₹2,450.02 करोड़
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संशोधित लागत: ₹2,873.95 करोड़
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टोल वसूली की नई तय अवधि: 26 अक्टूबर 2033 तक
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लेबड़-जावरा मार्ग:
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मूल लागत: ₹589.31 करोड़
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जून 2025 तक वसूली: ₹2,182.80 करोड़
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संशोधित लागत: ₹3,010.60 करोड़
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टोल वसूली की नई तय अवधि: 27 अप्रैल 2038 तक (यानी अगले 11 वर्ष और 4 माह तक टैक्स देना होगा)
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लागत से कई गुना अधिक टोल वसूले जाने के बावजूद लंबी अवधि तक टैक्स जारी रहने से आम जनता और वाहन चालकों में नाराजगी देखने को मिल रही है, जबकि दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर नए संशोधनों और ट्रैफिक वृद्धि का हवाला दिया जा रहा है।




