एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
महिला कैदियों के लिए संवेदनशील पहल: अब जेल में नहीं बल्कि अस्पतालों में होगा प्रसव, जन्म प्रमाण पत्र पर नहीं लगेगा जेल की तामीर का दाग
भोपाल: भगवान श्रीकृष्ण की तर्ज पर महिला कैदियों की कोख से जन्म लेने वाले मासूमों के जीवन पर जेल की चारदीवारी की छाप और मानसिक आघात न पड़े, इसके लिए जेल प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील और सराहनीय कदम उठाया है। मध्य प्रदेश की जेलों में अब महिला कैदियों का प्रसव जेल के भीतर नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों या जिला अस्पतालों में कराया जा रहा है। इसके साथ ही जन्म प्रमाण पत्र पर भी जेल के बजाय संबंधित क्षेत्र या अस्पताल का नाम दर्ज किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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जेलों में वर्तमान स्थिति: प्रदेश की विभिन्न जेलों में वर्तमान में लगभग 10 गर्भवती महिला कैदी हैं, जिनमें से 2 सजायाफ्ता और शेष विचाराधीन (अंडरट्रायल) हैं।
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अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव: जेल महानिदेशक वरुण कपूर के अनुसार, बड़ी जेलों में भले ही स्वास्थ्य सुविधाएं और अस्पताल मौजूद हैं, फिर भी गर्भवती महिला कैदियों को प्रसव के लिए हमेशा नजदीकी शासकीय अस्पतालों में ही भेजा जाता है। गर्भावस्था के दौरान हर हफ्ते स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों से उनकी नियमित जांच कराई जाती है, और हाई-रिस्क मामलों में विशेष निगरानी रखी जाती है ताकि आपात स्थिति में भी जेल के भीतर प्रसव की नौबत न आए।
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जन्म प्रमाण पत्र से जेल का नाम हटाने के निर्देश: शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि महिला कैदी के बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) में भूलकर भी ‘जेल’ का उल्लेख नहीं होना चाहिए। जन्म स्थान के रूप में केवल संबंधित क्षेत्र या अस्पताल का ही नाम दर्ज किया जाता है, ताकि बच्चे के भविष्य पर इसका कोई नकारात्मक सामाजिक प्रभाव न पड़े।
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15 दिन की पैरोल का प्रावधान: जानकारी के अभाव में कई बार महिलाएं इसका लाभ नहीं उठा पातीं, वरना कानून के तहत गर्भवती महिला कैदियों के पास प्रसव के लिए 15 दिन की पैरोल लेने की सुविधा भी उपलब्ध है, ताकि वे सुरक्षित माहौल में अपने बच्चे को जन्म दे सकें।




