एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
बड़े तालाब पर एनजीटी की सख्ती: अब आसमान से होगी ड्रोन और सैटेलाइट से निगरानी, 15 दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट; 3 महीने में हटाने होंगे अवैध निर्माण
भोपाल: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े निर्देशों के बाद राजधानी भोपाल के बड़े तालाब के सीमांकन और संरक्षण की प्रक्रिया अब बेहद हाईटेक तरीके से शुरू कर दी गई है। वर्तमान में तालाब का जलस्तर फुल टैंक लेवल (FTL) पर होने के कारण, इसकी वास्तविक और सटीक सीमा का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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आसमान से होगी निगरानी और हाईटेक सर्वे: बड़े तालाब और उसके आसपास के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण की थाह लेने के लिए ड्रोन मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी, जियो-टैगिंग, रिमोट सेंसिंग और ग्राउंड ट्रुथिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। गठित विशेष समिति को मात्र 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
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बढ़ेगा अतिक्रमण का दायरा: पूर्व में मार्च से जून के बीच किए गए शुरुआती सीमांकन के दौरान ही 347 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए थे। अब इस उन्नत तकनीकी सर्वे के बाद इस आंकड़े में और भी भारी बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है।
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निर्माण कार्यों पर सख्त प्रतिबंध: तालाब, वेटलैंड, बफर क्षेत्र और ‘जोन ऑफ इन्फ्लुएंस’ के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में—शहरी सीमाओं में 50 मीटर और ग्रामीण इलाकों में 250 मीटर तक—किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
2017 के नियमों के तहत होगी जांच और त्वरित कार्रवाई
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वेटलैंड रूल्स-2017 का दायरा: अतिक्रमण और अवैध निर्माणों की समीक्षा अब वेटलैंड रूल्स-2022 के बजाय वेटलैंड रूल्स-2017 के आधार पर की जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्ष 2017 के बाद से हुए सभी अनाधिकृत निर्माणों की गहराई से जांच होगी और निर्माण की तिथि तथा दी गई अनुमतियों की वैधता की पूरी पड़ताल की जाएगी।
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3 महीने की समयसीमा: सर्वे के दौरान चिह्नित किए गए सभी नियम-विरुद्ध और अवैध निर्माणों को कानूनन 3 महीने की अवधि के भीतर पूरी तरह से बेदखल कर हटाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है, जिससे भोज वेटलैंड और बड़े तालाब के प्राकृतिक स्वरूप को बचाया जा सके।




