भोपाल: मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति और शराब दुकानों के ई-टेंडर ने सरकार की तिजोरी भरने के संकेत दे दिए हैं। अब तक हुई छह चरणों की नीलामी प्रक्रिया में सरकार को करीब 11,827 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह साफ हुआ कि इस बार राजस्व में 20 से 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
प्रमुख बिंदु (HighLights):
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राजस्व का बड़ा लक्ष्य: पूरे वर्ष के लिए शराब दुकानों से 19,952 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है।
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शानदार प्रदर्शन: उमरिया, सीधी और शहडोल जैसे जिलों ने 100% लक्ष्य हासिल कर लिया है।
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तारीख में बदलाव: ऑनलाइन टेंडर खोलने की अंतिम तिथि 24 मार्च से बढ़ाकर अब 28 मार्च कर दी गई है।
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बड़े शहरों में सुस्ती: इंदौर और ग्वालियर जैसे महानगरों में अभी भी लक्ष्य से 20-22% की दूरी बनी हुई है।
जिलों का रिपोर्ट कार्ड: कहाँ हुई ‘जीत’ और कहाँ है ‘चुनौती’?
सरकार की समीक्षा में जिलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
1. 100% सफलता वाले जिले: इन जिलों में ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से शत-प्रतिशत राजस्व निष्पादन पूरा हो चुका है:
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उमरिया, सीधी, शहडोल, मंडला, डिंडोरी और खरगौन।
2. लक्ष्य से पीछे चल रहे जिले: इन शहरों में उम्मीद से कम निविदाएं प्राप्त हुई हैं, जिसके चलते अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं:
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इंदौर: 78% | ग्वालियर: 79% | धार: 76%
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शिवपुरी: 80% | रीवा: 85% | खंडवा: 82%
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अशोकनगर, सिंगरौली और नर्मदापुरम में भी काम अभी बाकी है।
उप मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भोपाल, जबलपुर, रतलाम और कटनी जैसे महत्वपूर्ण जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं ताकि 28 मार्च को होने वाली फाइनल प्रक्रिया में कोई कमी न रहे।
नीलामी प्रक्रिया: अब 28 मार्च को होगा फैसला
प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से ऑनलाइन निविदा प्रपत्र (Tender Forms) खोलने की तारीख को आगे बढ़ाया गया है। अब सभी टेंडर 28 मार्च 2026 को खोले जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त समय से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और राजस्व में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है।
निष्कर्ष: 2028 के विजन पर टिकी नज़र
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय किया गया 19,952 करोड़ का लक्ष्य यह दर्शाता है कि सरकार बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के लिए राजस्व के इस बड़े स्रोत पर काफी निर्भर है। यदि आगामी चरणों में इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहर भी 100% लक्ष्य छू लेते हैं, तो यह प्रदेश के आबकारी इतिहास की सबसे सफल नीलामी मानी जाएगी।




