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भोपाल के बाद अब इंदौर में 1 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा, EOW की सुस्ती पर उठे सवाल

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)

भोपाल / अपराध एवं भ्रष्टाचार डेस्क

श्रमोदय विद्यालय मेस घोटाला: इंदौर के एक करोड़ के कथित फर्जीवाड़े को जांच में शामिल न करने पर उठे सवाल, ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर पीड़ित कंपनी ने जताई नाराजगी

भोपाल: मध्य प्रदेश के श्रमोदय विद्यालयों में मेस भुगतान से जुड़े कथित वित्तीय घोटालों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। भोपाल में लगभग 1.55 करोड़ रुपये के कथित गबन के बाद, अब इंदौर स्थित श्रमोदय विद्यालय में भी करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। पीड़ित कंपनी का आरोप है कि तमाम सबूत देने के बावजूद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इंदौर के मामले को अब तक अपनी जांच में शामिल नहीं किया है। वहीं, भोपाल में प्राथमिकी दर्ज होने के 90 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी न होने से जांच की गति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • इंदौर का मामला जांच से बाहर रखने के आरोप: पीड़ित कंपनी के अधिवक्ताओं—शुभांक दीक्षित और अंकुर पांडेय के अनुसार, मुख्य आरोपी गौरव शर्मा इंदौर स्थित श्रमोदय विद्यालय में प्रबंधक के पद पर कार्यरत था। कंपनी ने 24 दिसंबर 2025 को ईओडब्ल्यू को दिए गए जवाब में इंदौर में हुई लगभग एक करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति के तथ्य प्रस्तुत किए थे, लेकिन इसे मुख्य जांच में नहीं जोड़ा गया।

  • भोपाल प्रकरण में 90 दिन बाद भी कार्रवाई सुस्त: भोपाल के श्रमोदय विद्यालय में 1.55 करोड़ रुपये के कथित मेस भुगतान फर्जीवाड़े को लेकर ईओडब्ल्यू ने 27 मई को सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। कंपनी का कहना है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और न ही चार्जशीट पेश की गई है, जबकि मुख्य आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका भोपाल न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी है।

  • बैंक खातों और दस्तावेजों को सुरक्षित करने की मांग: कंपनी के वकीलों ने न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत आवेदन देकर संबंधित बैंक खातों के केवाईसी दस्तावेज, खाता खोलने के अभिलेख, प्रमाणित बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन के मूल रिकॉर्ड सुरक्षित करने की मांग की है, ताकि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो। इस मामले में अदालत ने ईओडब्ल्यू को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं और अगली सुनवाई 12 नवंबर को तय की गई है।

  • निष्पक्ष जांच की मांग: कंपनी का स्पष्ट कहना है कि भोपाल के साथ-साथ इंदौर में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की भी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, जिससे पैसों के लेन-देन और इसमें संलिप्त अन्य लोगों के चेहरों से पर्दा उठ सके।

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