Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

सुन-बोल नहीं सकते तो क्या… अब सीधे बता सकेंगे अपनी परेशानी, MP में शुरू हुए देश के पहले ‘सांकेतिक मध्यस्थता केंद्र’

 

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्यप्रदेश में पहली बार मूक-बधिर और श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए सांकेतिक भाषा आधारित विशेष मध्यस्थता केंद्र की शुरुआत की गई है। राजधानी भोपाल के महिला थाना परिसर में शनिवार को देश के पहले सांकेतिक संवाद मध्यस्थता केंद्र का शुभारंभ हुआ।

इस पहल का उद्देश्य ऐसे लोगों को न्याय तक सरल, सम्मानजनक और त्वरित पहुंच उपलब्ध कराना है, जो बोलने और सुनने में असमर्थ होने के कारण अब तक अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रख पाते थे। इस केंद्र के माध्यम से पारिवारिक, वैवाहिक और अन्य सामाजिक विवादों का समाधान सांकेतिक भाषा के जरिए किया जाएगा।

 

अब श्रवण बाधित व्यक्ति बिना किसी बाहरी सहायता के सीधे अपनी समस्या बता सकेंगे। प्रशिक्षित साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर और मध्यस्थ उनकी बात समझकर समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

पांच शहरों में शुरू हुए केंद्र

इन केंद्रों का ई-लोकार्पण भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जबलपुर से किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सुप्रीम कोर्ट और मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश भी मौजूद रहे।

भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, रीवा और सीधी में भी ऐसे केंद्र शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही मध्यप्रदेश मूक-बधिर और श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए विशेष मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

एक माह पहले से दी गई थी ट्रेनिंग

इस पहल की तैयारी के लिए लगभग एक माह पहले इंदौर में 30 से 40 मध्यस्थों और साइन लैंग्वेज विशेषज्ञों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। अब यही प्रशिक्षित विशेषज्ञ इन केंद्रों में सेवाएं देंगे।

पहले कैसे होता था काम?

पहले ऐसे मामलों में एनजीओ या अन्य लोगों की मदद से शिकायतें सुनी जाती थीं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती थी। अब सीधे संवाद की सुविधा मिलने से मामलों का समाधान अधिक तेजी से हो सकेगा। उद्घाटन के दिन ही सोनम केदावत और अतुल केदावत के मामले में सांकेतिक भाषा की मदद से सफल सुलह-समझौता कराया गया, जिससे इस केंद्र की उपयोगिता पहले ही दिन साबित हो गई।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply