भोपाल। मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रहने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने का संदेश दिया है।
शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित विधायक दल की बैठक में पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि कांग्रेस की प्रतिष्ठा और वैचारिक संघर्ष का चुनाव है।
बैठक में थांदला विधायक वीर सिंह भूरिया और बीना विधायक निर्मला सप्रे को छोड़कर सभी कांग्रेस विधायक शामिल हुए। पार्टी नेताओं ने इसे एकजुटता का संकेत बताते हुए सकारात्मक माना। बताया गया कि भूरिया व्यक्तिगत कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके।
कमल नाथ बोले- यह पूरी कांग्रेस की लड़ाई
बैठक से वर्चुअली जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि राज्यसभा चुनाव पार्टी की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने विधायकों से एकजुट रहकर कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को विजयी बनाने का आह्वान किया।
कमल नाथ ने कहा कि यह चुनाव केवल मीनाक्षी नटराजन का नहीं, बल्कि कांग्रेस की विचारधारा और संगठन की मजबूती का चुनाव है। सभी विधायकों ने उनकी बात का समर्थन किया।
भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारे तो भी तैयार: कांग्रेस
प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी बैठक को संबोधित किया।
उमंग सिंघार ने दावा किया कि यदि भाजपा तीसरा प्रत्याशी भी मैदान में उतारती है, तब भी कांग्रेस अपनी सीट सुरक्षित रखने में सफल रहेगी। वहीं, जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक साथ हैं और हर राजनीतिक परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।
सोमवार को नामांकन दाखिल करेंगी मीनाक्षी
कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन सोमवार (8 जून) को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। उल्लेखनीय है कि वे विधायक दल की बैठक में अकेले ही अपने वाहन से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचीं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बैठक समाप्त होने के बाद पहुंचे, जबकि विवेक तन्खा वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
क्रॉस वोटिंग को लेकर सतर्क कांग्रेस
राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के मत आवश्यक हैं। कांग्रेस के पास वर्तमान में 64 विधायक हैं। हालांकि, बीना विधायक निर्मला सप्रे लंबे समय से भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई दे रही हैं। वहीं, विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण उनके मतदान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में कांग्रेस के पास सीमित अतिरिक्त मत ही बचते हैं, जिसके चलते पार्टी क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है।




