विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) व उच्च शिक्षा विभाग ने फर्जी विश्वविद्यालयों और अवैध शिक्षण संस्थानों के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया है। जिसका …और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
- यूजीसी और उच्च शिक्षा विभाग ने फर्जी विश्वविद्यालयों के खिलाफ संयुक्त जागरूकता अभियान शुरू किया
- केवल यूजीसी से मान्यता प्राप्त संस्थानों की डिग्रियां ही शैक्षणिक और रोजगार उद्देश्यों के लिए मान्य होंगी
- विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रवेश से पहले संस्थान की मान्यता जांचने की सलाह दी गई
भोपाल। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा department ने फर्जी विश्वविद्यालयों और अवैध शिक्षण संस्थानों के खिलाफ संयुक्त जागरूकता अभियान शुरू किया है।
अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों और अभिभावकों को शैक्षणिक धोखाधड़ी से बचाना और उनके भविष्य को सुरक्षित करना है।
इस संबंध में प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों, शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
यूजीसी की गाइडलाइन
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि केवल वही विश्वविद्यालय और संस्थान डिग्री प्रदान कर सकते हैं, जो राज्य, केंद्र या प्रांतीय अधिनियम के तहत स्थापित हों अथवा यूजीसी अधिनियम 1956 के अंतर्गत अधिकृत हों। आयोग ने चेतावनी दी है कि फर्जी संस्थानों से प्राप्त डिग्रियां किसी भी शैक्षणिक या रोजगार संबंधी उद्देश्य के लिए मान्य नहीं होंगी।
प्रवेश से पहले मान्यता जांचना जरूरी
उच्च शिक्षा विभाग ने 10वीं और 12वीं के बाद उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से कहा है कि किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता यूजीसी की आधिकारिक सूची में अवश्य जांच लें।
केवल विज्ञापनों के आधार पर प्रवेश लेने से बचें और किसी भी संदिग्ध संस्थान की जानकारी संबंधित प्राधिकरण को दें।




