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वारंटी में खराब OLA इलेक्ट्रिक स्कूटर पर मिला न्याय, उपभोक्ता आयोग ने पूरी रकम और मुआवजा लौटाने का दिया आदेश

 

भोपाल में इलेक्ट्रिक स्कूटर की खराब बैटरी और खराब सेवाओं से परेशान उपभोक्ता को राहत मिली है। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 23 Mar 2026 09:53:13 AM (IST)Updated Date: Mon, 23 Mar 2026 09:53:13 AM (IST)

वारंटी में खराब OLA इलेक्ट्रिक स्कूटर पर मिला न्याय, उपभोक्ता आयोग ने पूरी रकम और मुआवजा लौटाने का दिया आदेश

खराब स्कूटर पर उपभोक्ता आयोग ने सख्त निर्णय लिया (AI Generated Image)

HighLights

  1. ओला शोरूम को पूरी कीमत लौटाने का आदेश
  2. वारंटी अवधि में बैटरी खराब, नहीं मिला समाधान
  3. उपभोक्ता को आठ हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने निर्देश

भोपाल: भोपाल में एक इलेक्ट्रिक स्कूटर से जुड़े मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय की बेंच ने ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर शोरूम संचालक को उपभोक्ता को पूरी राशि लौटाने और मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।

खरीद के समय किए गए थे बड़े दावे

सेमराकला निवासी अरविंद खरे ने पिछले वर्ष अक्टूबर में नर्मदापुरम रोड स्थित ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर शोरूम से करीब 90 हजार रुपये में स्कूटर खरीदा था। खरीद के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों ने स्कूटर की कई खूबियां गिनाईं और तीन साल की वारंटी का भरोसा दिलाया। साथ ही दावा किया गया कि बैटरी एक बार पांच से छह घंटे चार्ज करने पर पूरा दिन चलेगी और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन देगी।

 

डेढ़ साल में ही आने लगीं गंभीर समस्याएं

हालांकि, स्कूटर खरीदने के लगभग डेढ़ साल बाद ही इसमें गंभीर तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं। स्कूटर की बैटरी अचानक खराब हो गई, जिससे वाहन स्टार्ट होना बंद हो गया। इसके अलावा सेंसर सिस्टम में भी खराबी आ गई।

सर्विस के बाद भी नहीं हुआ समाधान

उपभोक्ता ने स्कूटर को शोरूम में सर्विस के लिए जमा किया, जहां उसे ठीक करने का आश्वासन दिया गया। लेकिन सर्विस के बाद भी समस्याएं जस की तस बनी रहीं और स्कूटर दोबारा खराब हो गया। परेशान होकर अरविंद खरे ने स्कूटर शोरूम में ही छोड़ दिया, लेकिन शोरूम संचालक ने न तो उसे ठीक किया और न ही राशि लौटाई।

रोजमर्रा के कामों में आई परेशानी

स्कूटर खराब होने के कारण उपभोक्ता को दैनिक कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्हें आवागमन के लिए रैपिडो जैसी सेवाओं का सहारा लेना पड़ा। वहीं शोरूम संचालक ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि स्कूटर उपभोक्ता की लापरवाही के कारण खराब हुआ है।

आयोग ने माना सेवा में कमी

मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने चार माह के भीतर फैसला सुनाया। आयोग ने शोरूम संचालक और कंपनी को सेवा में कमी और त्रुटिपूर्ण उत्पाद बेचने का दोषी पाया। आदेश में कहा गया कि उपभोक्ता को स्कूटर की पूरी कीमत लौटाई जाए और साथ ही आठ हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएं।

नामांतरण में सहयोग के निर्देश

आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि राशि प्राप्त होने के बाद उपभोक्ता स्कूटर को कंपनी के नाम पर नामांतरित कराने में सहयोग करेगा।

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