एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) मध्य प्रदेश डेस्क
विदिशा की उदयगिरी गुफाओं में मौजूद है देवी दुर्गा का दुर्लभ और प्राचीन स्वरूप: 1700 साल पुरानी महिषासुरमर्दिनी की 12 हाथों वाली प्रतिमा
भोपाल: मध्य प्रदेश अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के लिए पूरी दुनिया में विशेष पहचान रखता है। प्रदेश के विदिशा जिले में स्थित ऐतिहासिक उदयगिरी गुफाओं में शक्ति उपासना के सबसे प्राचीन और दुर्लभ पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं। इन्हीं गुफाओं में देवी दुर्गा का संहारक रूप यानी ‘महिषासुरमर्दिनी’ की एक बेहद दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जिसके 12 हाथ हैं। गुप्तकालीन वास्तुकला का यह उत्कृष्ट नमूना करीब 1700 साल पुराना माना जाता है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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मध्य भारत की सबसे प्राचीन प्रतिमा: गुप्त काल (चौथी-पांचवीं शताब्दी) के दौरान निर्मित यह प्रतिमा मध्य भारत में मिली देवी दुर्गा की सबसे प्राचीन प्रतिमाओं में गिनी जाती है। देश के चुनिंदा हिस्सों में ही ऐसे प्राचीन स्वरूप देखने को मिलते हैं।
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प्रतिमा की बनावट और विशेषताएं: उदयगिरी की गुफा की उत्तरी दीवार पर उकेरी गई इस प्रतिमा में देवी ने महिषासुर (राक्षस) की गर्दन को मजबूती से दबोच रखा है। उनका दाहिना पैर राक्षस की पीठ पर और बायां पैर एक आधार पर टिका हुआ है, जिसे कुछ विशेषज्ञ उनके वाहन (शेर) के रूप में पहचानते हैं।
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अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित 12 हाथ: इस प्रतिमा में देवी के कुल 12 हाथ दर्शाए गए हैं, जिनमें दाहिने ओर के एक हाथ में त्रिशूल है जिससे उन्होंने राक्षस को बींध रखा है। इसके अलावा अन्य हाथों में तलवार, ढाल, धनुष-बाण, गदा, पानपात्र और खप्पर जैसे पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं।
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विशेषज्ञों का मत: जाने-माने पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास के अनुसार, इन मंदिर-नुमा गुफाओं का निर्माण गुप्त काल में चौथी शताब्दी के उत्तरार्द्ध और पांचवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में मालवा विजय के उपलक्ष್ಯ में हुआ था। देश की अन्य मूर्तियों में जहाँ देवी के 8, 10 या 20 हाथ दिखाए गए हैं, वहीं उदयगिरी की इस प्रतिमा में 12 हाथों का होना इसे बेहद खास और अनूठा बनाता है।




