एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल / क्राईम एवं प्रशासनिक डेस्क
फोरेंसिक संसाधनों के बावजूद लचर व्यवस्था: करोड़ों की मोबाइल वैन और महंगे उपकरण धूल फांक रहे; वैज्ञानिक अधिकारियों की भर्ती में दो साल की सुस्ती से दोहरी मार
भोपाल: मध्य प्रदेश में अपराधों की वैज्ञानिक और पुख्ता जांच के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक मोबाइल फोरेंसिक वैन तो खरीद ली गईं, लेकिन प्रशासनिक और भर्ती प्रक्रियाओं की भारी सुस्ती के कारण इन संसाधनों का धरातल पर पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि प्रशिक्षित वैज्ञानिक अधिकारियों के अभाव में कई वाहन या तो मुख्यालय में खड़े हैं या जिलों में पहुंचने के बावजूद निष्क्रिय पड़े हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
भर्ती प्रक्रिया में दो साल की देरी: राज्य में वैन की आवश्यकता के साथ वैज्ञानिक अधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव वर्ष 2024 में दिया गया था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने में करीब दो साल का समय लग गया। अब इस साल नवंबर में परीक्षा प्रस्तावित है, जिसके बाद परिणाम, साक्षात्कार, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति आदेश आने में अभी और समय लगेगा।
-
संसाधनों की उपयोगिता पर संकट: पहला बैच मिलने तक वैन में मौजूद महंगे उपकरणों की वारंटी और जांच किट में रखे रसायनों की उपयोग अवधि (एक्सपायरी) समाप्त होने की कगार पर पहुंच जाएगी। इससे शासन को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ेगी—एक तरफ वाहन खड़े रहेंगे, तो दूसरी तरफ उन्हें दोबारा उपयोग योग्य बनाने के लिए अतिरिक्त बजट खर्च करना होगा।
-
231 पुलिस अनुविभागों तक पहुंचाना था नेटवर्क: प्रदेश के सभी 231 पुलिस अनुविभागों में मोबाइल फोरेंसिक वैन पहुंचाने और सात साल या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए 200 से अधिक वैज्ञानिक अधिकारियों की आवश्यकता थी। हालांकि, एक साथ पूरी भर्ती करने के बजाय पदों को तीन चरणों में बांट दिया गया।
-
वर्तमान स्थिति और आंशिक उपयोग: पहले चरण में केवल 81 पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिलीं 57 वैन में से केवल 28 का ही 19 जिलों में आंशिक इस्तेमाल हो पा रहा है, जबकि बाकी वाहन पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण या तो मुख्यालय में खड़े हैं या उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
-
विकल्पों पर अमल नहीं: एफएसएल अधिकारियों के अनुसार, मानव संसाधन की कमी से निपटने के लिए ‘संविदा नियुक्ति’ का विकल्प भी सुझाया गया था, लेकिन समय रहते इस पर अमल नहीं किया गया। वर्तमान में आसपास के जिलों में पदस्थ FSL अधिकारियों को ही मोबाइल वैन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
विभाग का पक्ष: फोरेंसिक साइंस विभाग के एडीजी केपी वेंकटेश्वर राव के अनुसार, विभाग में भर्ती प्रक्रिया जारी है और नियुक्तियां जल्द ही पूरी कर ली जाएंगी, जिसके बाद वैज्ञानिक अधिकारियों की कमी दूर होने से वैन का संचालन पूरी क्षमता के साथ सुनिश्चित हो सकेगा।




