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समय पर इलाज न मिलने से जा रही हाथियों की जान; MP में वन्यजीव डॉक्टरों के कैडर को लेकर बड़ा खुलासा

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

मध्य प्रदेश वन विभाग में वन्यजीव चिकित्सकों का अलग कैडर नहीं: समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने से बढ़ रहा हाथियों और वन्यजीवों का जीवन संकट

भोपाल: मध्य प्रदेश में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर समस्या सामने आई है। प्रदेश में जंगली हाथियों के स्थायी ठिकाने बनने और पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बावजूद वन विभाग में वन्यजीव चिकित्सकों का कोई अलग कैडर नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता न होने और समय पर उचित इलाज न मिल पाने के कारण वन्यजीवों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। हाल ही में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हथिनी स्मिता की मौत के बाद इस व्यवस्था पर फिर से बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी: मध्य प्रदेश के 11 राष्ट्रीय उद्यानों, 9 टाइगर रिजर्व, 26 अभयारण्यों और 1 ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व की देखरेख का जिम्मा केवल सीमित चिकित्सकों पर है, क्योंकि वन विभाग में वन्यजीव चिकित्सकों का अलग से कोई कैडर नहीं है।

  • सतपुड़ा में हथिनी स्मिता की मौत: हाल ही में 10 अगस्त को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना परिक्षेत्र में 46 वर्षीय मादा हाथी स्मिता की नर हाथी के हमले में घायल होने के बाद मौत हो गई। समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

  • बांधवगढ़ की दर्दनाक घटना: इससे पहले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी कोदो की फसल खाने से 10 हाथियों की मौत हो गई थी, उस समय भी वहां कोई वन्यप्राणी चिकित्सक उपलब्ध नहीं था।

  • मौजूदा अमले की स्थिति: वर्तमान में वन विभाग में 10 पशु चिकित्सक संविलियन के जरिए और 2 चिकित्सक पशु चिकित्सा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं, जो इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं।

हाथियों की घटती संख्या और चुनौतियाँ

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हथिनी स्मिता की मृत्यु के बाद अब वहां हाथियों की संख्या 9 से घटकर 8 रह गई है, जबकि एक अन्य हथिनी ‘अंजुगम’ (उम्र 75 वर्ष से अधिक) को वृद्धावस्था के कारण रिटायर कर दिया गया है। दूसरी ओर, बांधवगढ़ क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 70 जंगली हाथी विचरण कर रहे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वन विभाग में वन्यजीव चिकित्सा के लिए एक समर्पित कैडर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस दल का गठन नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की त्रासदियों को रोकना बेहद मुश्किल होगा।

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