जब मैं यह जान गया कि अब मैं भारत के लिए नहीं खेल पाऊंगा तब मैंने अपने दूसरे करयिर के बारे में सोचना शुरू किया. प्रियांक पांचाल ने अचानक संन्यास के सवाल पर यह जवाब दिया है.
प्रियांक पांचाल ने घरेलू क्रिकेट में 37 शतक लगाए हैं. नई दिल्ली. ‘हर क्रिकेटर के दो करियर होते हैं. प्लेइंग और नॉन प्लेइंग करियर. जब मैं यह जान गया कि अब मैं भारत के लिए नहीं खेल पाऊंगा तब मैंने अपने दूसरे करयिर के बारे में सोचना शुरू किया. यह तो पक्का है कि ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो क्रिकेट से बड़ी हैं.’ घरेलू क्रिकेट में 37 शतक लगाने वाले प्रियांक पांचाल ने एक प्रशंसक के सवाल में यह जवाब दिया. प्रियांक पांचाल ने अपनी आखिरी पारी इसी साल फरवरी में खेली थी, जिसमें उन्होंने 148 रन बनाए थे.
प्रियांक पांचाल ने इसी साल मई में सक्रिय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. उनकी गिनती उन बैटर्स में होती है, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में बेहद शानदार प्रदर्शन किया लेकिन बदकिस्मती से भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाए. प्रियांक पांचाल ने 127 फर्स्ट क्लास मैच में 45.18 की औसत से 29 शतकों की मदद से 8856 रन बनाए. उन्होंने 97 लिस्ट ए मैच खेले और 40.80 की औसत और 8 शतकों की मदद से 3672 रन बनाए. उन्होंने 59 टी20 मैचों में 28.71 की औसत से 1522 रन बनाए.
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गुजरात के लिए खेलने वाले प्रियांक पांचाल ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘आस्क मी एनीथिंग’के जरिये फैंस के सवालों के जवाब दिए. 35 साल के प्रियांक पांचाल के रहते गुजरात ने रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और मुश्ताक अली ट्रॉफी जीती. तीनों फॉर्मेट में बेहतरीन लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रियांक पांचाल कॉमेंट्री या कोचिंग में करियर बना सकते हैं.
प्रियांक पांचाल दो बार भारतीय प्लेइंग इलेवन में आते-आते रह गए. एक बार तब जब उन्होंने 2016-17 में रणजी ट्रॉफी में 1310 रन बनाए, जिसमें उनका बेस्ट स्कोर 314 रन था. उनके इस प्रदर्शन की बदौलत गुजरात ने खिताब जीता. दूसरी बार उन्हें 2021 में रोहित शर्मा के रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में रिजर्व ओपनर के शामिल किया लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल पाई.




