मैदान से बड़ा था देश का सम्मान
नई दिल्ली। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का करियर अनगिनत यादगार पलों से भरा पड़ा है। लेकिन एक किस्सा ऐसा भी है, जिसने उनके समर्पण और जज़्बे की मिसाल पेश की। 2003 आईसीसी वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ जोहान्सबर्ग में खेले गए मुकाबले के दौरान सचिन ने पेट खराब होने के बावजूद 160 मिनट तक बल्लेबाजी की।
टिशू पेपर बन गया “गुप्त हथियार”
अपनी आत्मकथा “Playing It My Way” में सचिन तेंदुलकर ने बताया कि उस दिन उनकी हालत इतनी खराब थी कि दौड़ना भी मुश्किल हो रहा था। पैंट खराब होने का डर बना हुआ था। ऐसे में उन्होंने अंडरवियर में टिशू पेपर रखकर बल्लेबाजी करने का अनोखा उपाय निकाला।
खेल के प्रति समर्पण की मिसाल
ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान उन्हें बार-बार ड्रेसिंग रूम भागना पड़ रहा था, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनका कहना था – “मैंने कभी देश के लिए खेलने का मौका हाथ से जाने नहीं दिया, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न रही हों।”
प्रेरणा का स्रोत
यह वाकया बताता है कि सचिन तेंदुलकर केवल रन बनाने वाली मशीन नहीं थे, बल्कि मैदान पर उनका समर्पण, धैर्य और जज़्बा भी उतना ही बड़ा था। यही कारण है कि वह सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का नाम हैं।




