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MP गजब है! पुलिस ने चोरी के संदेही को गुपचुप पांच दिन हिरासत में रखा, आरोपी नहीं बना, फिर भी थाने से भागने पर केस

 

भोपाल। राजधानी पुलिस का एक हैरान कर देने वाला कारनामा सामने आया है। जिसमें चोरी के मामले में एक संदेही को शाहपुरा पुलिस ने पांच दिन तक गुपचुप तरीके से थाने में रखकर पूछताछ की। मौका मिलते ही जब वह छत के रास्ते गायब हो गया, तो उसके खिलाफ अभिरक्षा से भागने का केस दर्ज कर दिया। ताज्जुब की बात तो यह है कि संदेही का ना तो कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड मिला है और ना ही वर्तमान में उस पर पुलिस ने कोई केस दर्ज किया है।

जिस प्रकरण में उससे पांच दिन तक मेहमान बनाकर रखा था, उसमें पिछले माह पुलिस खात्मा भी लगा चुकी है। खात्मा रिपोर्ट पर एसीपी ने अपनी मोहर भी लगाई थी। यहां तक तो ठीक है, पर अधिकारियों ने संदेही के कथित रूप से फरार होने का ठीकरा भी ऐसे पुलिसकर्मियों पर फोड़ दिया, जिनका इस पूरे मामले से सीधे तौर पर कोई लेना देना ही नहीं था।

 

वहीं जिन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी में वह भागा और जो उसे पकड़कर लाए थे, उन चहेतों को बचा लिया गया। सीए के घर में हुई चोरी के केस में संदेही को पकड़ा था अगस्त 2025 में शाहपुरा क्षेत्र में एक सीए के घर में चोरी की वारदात हुई थी, जिसमें लाखों के सोने के जेवर व नकदी गायब हुई थी। पुलिस ने सीए की शिकायत पर चोरी का केस दर्ज किया था। पुलिस को घटनास्थल से सीसीटीवी कैमरे मिले थे, लेकिन उसमें आरोपित का चेहरा नहीं दिखाई दिया था। यही कारण बताकर 12 दिसंबर 2025 को ही शाहपुरा पुलिस ने मामले में खात्मा लगा दिया था।

छत का दरवाजा खुला था, आरोपित वहीं से भाग निकला

15 जनवरी को शाहपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक भानू गुर्जर, प्रधान आरक्षक सुरेंद्र यादव और आरक्षक बाबूलाल ने इंद्रा नगर मल्टी से 19 वर्षीय विजय उर्फ लड्डू पिल्लई को चोरी के संदेह में हिरासत में लिया। पुलिस ने उसे थाने के उस कमरे में रखा, जहां सीसीटीवी फुटेज नहीं लगे हैं ताकि उससे गैरकानूनी तरीके से पूछताछ की जा सके। पुलिस पांच दिन तक उससे पूछताछ करती रही, लेकिन किसी भी प्रकरण में आरोपित नहीं बनाया।

19 जनवरी को दोपहर 3:44 बजे विजय मौका देखकर सीढ़ियों के रास्ते छत पर पहुंचा। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब तक सुध ली, तब तक संदेही फरार हो गया। संदेही के भागने के सात घंटे बाद पुलिस ने की थाने में एंट्री शाहपुरा पुलिस का कारनामा सिर्फ संदेही को हिरासत में लेकर पांच दिन तक उससे गैरकानूनी रूप से पूछताछ करना ही नहीं था, बल्कि पुलिस ने उसे रिकॉर्ड में लेने के लिए भी खूब गोलमाल किया।

पुलिस ने 15 तारीख को पकड़ने के बाद उसकी कोई एंट्री नहीं की, वहीं जब 19 की दोपहर को वह चकमा देकर भागा, उसके सात घंटे बाद रात करीब 10:45 बजे पुलिस ने उसकी एंट्री की। साथ ही 11:30 बजे उसके विरूद्ध केस दर्ज किया। फर्जीवाड़े में जो थाना प्रभारी घिरे, उन्होंने ही कर दी जांच शाहपुरा पुलिस के इस फर्जीवाड़े को लेकर थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर सवालों में घिरे हैं और उनकी भूमिका संदिग्ध है। इसके बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों को विश्वास में लेकर लोकेंद्र ने स्वयं एसीपी उमेश तिवारी के साथ जांच कर ली और सीधे तौर पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बजाए, उन्हें निशाना बना दिया, जो न तो संदेही को पकड़ने में शामिल थे और न ही उसके भागने के दौरान थाने में मौजूद ही थे।

पुलिस के फर्जीवाड़े पर पांच सवाल

  • संदेही को पांच दिन तक गैरकानूनी रुप से हिरासत में क्यों रखे रहे?
  • थाने में आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी होने के बावजूद संदेही हिरासत से कैसे भाग निकला?
  • जब संदेही के विरुद्ध अपराध ही दर्ज नहीं तो फिर पुलिस अभिरक्षा से भागने का केस क्यूं दर्ज किया?
  • जिस दिन संदेही को हिरासत में लिया, उस दिन एंट्री नहीं की, उसके भाग जाने के बाद थाने में एंट्री क्यों?
  • एसआई जगन्नाथ परतेती और आरक्षक पुष्पेंद्र जाट ने न संदेही को पकड़ा और न ही वे उसके भागने के दौरान थाने में मौजूद थे, फिर थाना प्रभारी और मुंशी को छोड़कर इन पर कार्रवाई क्यों?

शाहपुरा पुलिस ने संदेही को चोरी के मामले में हिरासत में लिया था। उससे पूछताछ की जा रही थी। संदेही के भागने पर ही केस दर्ज किया गया है। यदि उसका सही रिकार्ड नहीं रखा गया है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई है तो इसकी दोबारा जांच करेंगे- विवेक सिंह, प्रभारी डीसीपी जोन-1।

 

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