आम बजट 2026-27: शहरी विकास को मिली बड़ी उड़ान, मध्य प्रदेश के टियर-2 व टियर-3 शहरों के लिए 12.2 लाख करोड़ का ऐलान
भोपाल, 02 फरवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट 2026-27 में देश के शहरी परिदृश्य, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास पर ऐतिहासिक जोर दिया गया है। बजट में पांच लाख से अधिक आबादी वाले इन शहरों के समग्र विकास के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे मध्य प्रदेश के अधिकांश प्रमुख शहरों को भारी लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रदेश के लिए शहरी विकास मद में कुल 95,522 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
प्रदेश के शहरों को मिलेगा लाभ, बड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा
इस बड़े प्रावधान का सीधा लाभ भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों को मिलेगा। बजट में कई ऐसी योजनाओं को बल मिला है जो शहरी ढांचे, यातायात और रहन-सहन को बदल सकती हैं:
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मेट्रो विस्तार: मेट्रो परियोजनाओं के लिए 29,740 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान इंदौर-भोपाल के बाद अब जबलपुर, ग्वालियर जैसे शहरों में मेट्रो रेल के विस्तार की राह आसान करेगा।
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सिटी इकोनॉमिक रीजन: शहरी आर्थिक क्षेत्र विकसित करने के लिए 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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नगर पालिका बॉन्ड को प्रोत्साहन: 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के नगर पालिका बॉन्ड के एकल निर्गम पर 100 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे शहरों को अपने विकास के लिए धन जुटाने में मदद मिलेगी।
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पीएम आवास योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18,625 करोड़ रुपये के बजट से राज्य के लक्ष्यों को पूरा करने में सहूलियत होगी।
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अमृत 2.0: अमृत योजना के दूसरे चरण के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान पेयजल और सीवरेज व्यवस्था सुदृढ़ करेगा।
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शहरी चुनौती कोष: 10,000 करोड़ रुपये के इस कोष से शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास और जल-स्वच्छता पहल को गति मिलेगी।
विशेषज्ञों की राय: “संभावनाओं के नए द्वार, चुनौती है समन्वय”
इस बजटीय घोषणा पर मध्य प्रदेश के शहरी नियोजन और विकास के विशेषज्ञों ने इसे सराहा, साथ ही कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया।
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प्रो. अखिलेश शुक्ला, शहरी नियोजन विशेषज्ञ, एम.आई.टी.एस., भोपाल: “12.2 लाख करोड़ का आवंटन टियर-2 शहरों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हालाँकि, सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह धनराशि एकीकृत योजनाओं—जैसे सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास और टिकाऊ जल प्रबंधन—में कितनी प्रभावी ढंग से लगाई जाती है। मेट्रो विस्तार के प्रावधान से भोपाल और इंदौर की तर्ज पर अन्य शहर भी यातायात संकट से उबर सकेंगे।”
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श्रीमती मीरा शर्मा, अर्थशास्त्री व पूर्व सदस्य, मध्य प्रदेश राज्य योजना बोर्ड: “नगर पालिका बॉन्ड के लिए प्रोत्साहन एक स्वागतयोग्य कदम है। इससे शहरी स्थानीय निकाय वित्तीय रूप से अधिक स्वायत्त हो सकेंगे और उनकी परियोजनाओं की गति बढ़ेगी। ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ और ‘एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी’ से निवेश आकर्षित होगा और रोजगार सृजन को बल मिलेगा।”
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अरविंद जैन, सचिव, मध्य प्रदेश नागरिक फोरम: “बजट में शहरी विकास पर फोकस सही दिशा में है। लेकिन, धन के आवंटन और उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह विकास पर्यावरण के अनुकूल हो और शहरों का ऐतिहासिक व सांस्कृतिक चरित्र बना रहे। अमृत 2.0 के तहत जल व स्वच्छता पर जोर एक जरूरी कदम है।”
निष्कर्ष:
आम बजट 2026-27 ने मध्य प्रदेश के शहरी विकास के लिए एक मजबूत वित्तीय आधार तैयार किया है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार किस तरह इन संसाधनों का उपयोग करके भोपाल, इंदौर समेत अन्य शहरों के बुनियादी ढांचे और जीवन स्तर में ठोस सुधार लाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि योजनाबद्ध तरीके से और समन्वय के साथ कार्य किया गया, तो यह बजट प्रदेश के शहरी परिदृश्य को नया रूप दे सकता है।




