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मध्य प्रदेश में पहली व दूसरी कक्षा के बच्चों की नहीं होगी वार्षिक परीक्षा, दक्षता पर मूल्यांकन किया जाएगा

 

मध्य प्रदेश में राज्य शिक्षा केंद्र ने छोटे बच्चों पर परीक्षा का दबाव कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। वहीं तीसरी, चौथी, छठवीं और सातवीं …और पढ़ें

मध्य प्रदेश में पहली व दूसरी कक्षा के बच्चों की नहीं होगी वार्षिक परीक्षा, दक्षता पर मूल्यांकन किया जाएगा

राज्य शिक्षा केंद्र ने स्कूलों को परीक्षा के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।- प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. मूल्यांकन सतत एवं समग्र आकलन पद्धति के आधार पर किया जाएगा
  2. वहीं तीसरी, चौथी, छठवीं व सातवीं की परीक्षा नौ से 14 मार्च तक होंगी
  3. विद्यार्थियों द्वारा भाषा के चयन को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए

भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस वर्ष भी पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा नहीं होगी। उनका मूल्यांकन दक्षता के आधार पर किया जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि इन कक्षाओं के बच्चों का मूल्यांकन सतत एवं समग्र आकलन पद्धति के आधार पर किया जाएगा।

छोटे बच्चों पर परीक्षा का दबाव कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। वहीं तीसरी, चौथी, छठवीं और सातवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं नौ मार्च से शुरू होकर 14 मार्च तक संचालित होंगी। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक है। स्कूलों को परीक्षा के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

 

तीनों भाषाओं का चयन करना होगा

राज्य शिक्षा केंद्र ने भाषा विषयों के चयन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार यदि कोई विद्यार्थी प्रथम भाषा के रूप में हिंदी, उर्दू या मराठी का चयन करते हैं तो द्वितीय भाषा के रूप में अंग्रेजी लेना अनिवार्य होगा।

वहीं यदि प्रथम भाषा के रूप में अंग्रेजी चुनी जाती है तो द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी का चयन करना आवश्यक रहेगा। इसके अलावा जिन विद्यार्थियों ने प्रथम भाषा के रूप में उर्दू या मराठी का चयन किया है, उनके लिए तृतीय भाषा के रूप में हिंदी का चयन अनिवार्य किया गया है।

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