अग्रसर इंडिया ब्यूरो | भोपाल मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और एकीकृत बनाने के लिए राजधानी भोपाल में ‘सेंट्रल विस्टा’ (स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स) का खाका तैयार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के डिजाइन को हरी झंडी दे दी है। लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट न केवल सरकारी कामकाज का तरीका बदलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल भी पेश करेगा।
पुराने भवनों की विदाई, नए दौर की शुरुआत दशकों पुराने हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन अब इतिहास का हिस्सा बनेंगे। इनकी जगह आधुनिक तकनीक से लैस 12 नए टावर खड़े किए जाएंगे।
-
निर्मित क्षेत्र (Built-up Area): पुराने भवनों का क्षेत्रफल 76,500 वर्ग मीटर था, जिसे नए प्रोजेक्ट में बढ़ाकर 1.60 लाख वर्ग मीटर (लगभग दोगुना) किया जा रहा है।
-
डेडलाइन: हाउसिंग बोर्ड को 30 जून तक इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) फाइनल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट फर्म मेसर्स सीपी कुकरेजा का चयन किया गया है।
प्रोजेक्ट की 5 बड़ी विशेषताएं: जो इसे बनाएंगे ‘फ्यूचरिस्टिक’
-
साझा छत (Shared Pergola): सभी 12 टावरों को एक विशाल साझा छत से जोड़ा जाएगा। यह न केवल परिसर को ठंडा रखेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर सोलर ऊर्जा का उत्पादन भी करेगी।
-
ग्रीन कवर में 4 गुना बढ़ोतरी: पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए हरित क्षेत्र को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर किया जा रहा है।
-
कॉर्पोरेट स्टाइल ऑफिस: सभी 33 विभागों के 59 कार्यालय अब एक ही छत के नीचे होंगे, जिससे अंतर-विभागीय समन्वय बेहतर होगा।
-
कनेक्टिविटी: आम जनता के लिए मेट्रो स्टेशन से सीधे कवर्ड पाथ-वे, हॉकर्स कॉर्नर और सुगम सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था होगी।
-
विशाल पार्किंग: आगामी 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी।
विभागों की डिमांड: 1 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा जगह की मांग जीएडी के सर्वे में सामने आया है कि प्रदेश के 33 विभागों ने नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होने की इच्छा जताई है। इन विभागों ने कुल 1.03 लाख वर्ग मीटर जगह की मांग की है। सरकार की स्पष्ट नीति है कि अब किसी भी विभाग को अलग से नई जमीन आवंटित नहीं होगी, सभी को इसी सेंट्रल विस्टा में समाहित किया जाएगा।
अग्रसर इंडिया विश्लेषण: क्यों जरूरी है यह बदलाव?
वर्तमान में सरकारी दफ्तर अलग-अलग जगहों पर बिखरे हुए हैं, जिससे नागरिकों को एक काम के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। नया कॉम्प्लेक्स न केवल समय बचाएगा, बल्कि ‘सिंगल विंडो’ कल्चर को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही, पुराने भवनों के रखरखाव पर होने वाले भारी खर्च में भी कटौती होगी।
“प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और आम नागरिकों की सुविधा के लिए यह एक युगांतरकारी प्रोजेक्ट है। हम शासन की मंशा के अनुरूप तेजी से काम कर रहे हैं।” > — गौतम सिंह, कमिश्नर, एमपी हाउसिंग बोर्ड




