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एसआईआर के काम में मध्य प्रदेश की तरह अन्य राज्यों में न हो गड़बड़ी, भाजपा निर्वाचन आयोग को देगी सुझाव

 

निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का काम बीएलओ के भरोसे छोड़ दिया और बीएलओ न तो शत-प्रतिशत गणना पत्रक वितरण कर सके और न ही दोबारा मतदाताओं के घर गए। …और पढ़ें

 

एसआईआर के काम में मध्य प्रदेश की तरह अन्य राज्यों में न हो गड़बड़ी, भाजपा निर्वाचन आयोग को देगी सुझाव

मध्य प्रदेश में एसआईआर के दौरान हुई गड़‍बड़‍ियों को बताएगी भाजपा। – प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. असंतुष्ट भाजपा भारत निर्वाचन आयोग को लिखेगी पत्र
  2. कई मतदाताओं का नाम सूची में नहीं जुड़ सका
  3. एसआईआर का काम बहुत जल्दबाजी में किया गया

 भोपाल। मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के काम से असंतुष्ट भारतीय जनता पार्टी भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर सुझाव देगी, ताकि अन्य राज्यों में एसआईआर के काम में गड़बड़ी न हो। भाजपा का कहना है कि मप्र में एसआईआर का काम बहुत जल्दबाजी में किया गया।

भाजपा का आरोप है कि निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का काम बीएलओ के भरोसे छोड़ दिया और बीएलओ न तो शत-प्रतिशत गणना पत्रक वितरण कर सके और न ही दोबारा मतदाताओं के घर गए। इस वजह से कई मतदाताओं का नाम सूची में नहीं जुड़ सका।

 

भाजपा ने एसआईआर के कार्य के समय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से बार-बार विधानसभावार मतदाताओं का डाटा भी मांगा लेकिन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पार्टी के बीएलए बूथवार मतदाताओं की ठीक से पड़ताल नहीं कर सके। अब इस पूरे मामले में आयोग को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए सुझाव दिए जाएंगे।

पत्र लिखकर दिए जाएंगे सुझाव

एसआईआर की भाजपा की प्रदेश टोली ने मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पहले ही सुझाव दिए थे कि बीएलओ की तरह ही राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के बीएलए को भी प्रशिक्षण दें, इससे एकरूपता रहेगी और काम जल्दी होगा, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह सुझाव भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली को पत्र लिखकर दिए जाएंगे।

इसमें भाजपा यह भी बताएगी कि अनुपस्थित, डुप्लीकेट, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं के मामले में बीएलओ ने घर का ताला बंद होने पर दरवाजे के नीचे से गणना पत्रक नहीं डाला ओर घर के मतदाता को अनुपस्थित बता दिया, न ही तीन बार घर जाकर देखा। बीएलओ केवल एक बार घर गए, इस तरह प्रदेश भर में 8.50 लाख मतदाता अनुपस्थित बता दिए।

लिस्ट से सीधे नाम काट दिए

वहीं माता पिता दादा के आधार पर गणना पत्रक नहीं भरने वाले मतदाताओं को एसडीएम की ओर से नोटिस दिए गए, जिसके बाद 6,50 लाख मतदाताओं ने अपने नाम जुड़वाए। निर्वाचन आयोग को चाहिए था कि वह प्रदेश के 22.50 लाख शिफ्टेड और अनुपस्थित लोगों को भी नोटिस दें, इन्हें पड़ोसियों की मदद से पूछताछ कर ढूंढकर पता लगाया जाना था कि ये कहां गए, लेकिन यह भी नहीं किया गया। इनके सूची से सीधे नाम काट दिए गए। भाजपा इन तमाम विषयों को लेकर निर्वाचन आयोग को सुझाव देगी, ताकि कोई वैध मतदाता न छूटे।

 

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