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एमपी में खुदकुशी के आंकड़े डराने वाले: 4 साल में सागर और भोपाल टॉप पर, विधानसभा में सरकार ने पेश की रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं अब केवल पुलिस फाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज और सरकार के लिए खतरे की घंटी बन गई हैं। बुधवार को विधानसभा में नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले चार वर्षों (1 जनवरी 2022 से अब तक) के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के कुछ जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने मौत को गले लगाया है।


खुदकुशी के ‘हॉटस्पॉट’: ये जिले हैं सबसे आगे

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के पांच जिलों में आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं:

जिला आत्महत्या के मामले (4 वर्ष)
सागर 2,451
भोपाल 2,333
खरगोन 2,004
धार 1,963
इंदौर 1,776

वहीं, छिंदवाड़ा (94), अनूपपुर (80) और पांढुर्णा (17) जैसे जिले इस सूची में सबसे नीचे हैं, जहां तुलनात्मक रूप से मामले काफी कम हैं।


क्यों जान दे रहे हैं लोग? पुलिस ने गिनाए ये मुख्य कारण

विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में आत्महत्या के पीछे के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारणों का भी खुलासा किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुख्य वजहें ये रहीं:

  • निजी कारण: मानसिक अवसाद (डिप्रेशन), लंबी बीमारी, शराब की लत और पारिवारिक कलह।

  • भावनात्मक और सामाजिक: प्रेम प्रसंग, चरित्र पर संदेह, शादी न होना और दहेज प्रताड़ना।

  • आर्थिक और करियर: व्यापार में घाटा, कर्ज के कारण आर्थिक तंगी और परीक्षा में फेल होना।

  • आधुनिक समस्याएं: मोबाइल की लत और छोटी-छोटी बातों पर आने वाला गुस्सा।


संभागवार स्थिति: इंदौर-उज्जैन और भोपाल संभाग का हाल

रिपोर्ट में क्षेत्रवार डेटा भी दिया गया है, जो बताता है कि विकास के साथ-साथ मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है:

  • इंदौर-उज्जैन संभाग: यहां खरगोन और धार ने इंदौर को भी पीछे छोड़ दिया है। उज्जैन (बाबा महाकाल की नगरी) में पिछले 4 साल में 119 मामले आए, जिनमें से 50 मामले अकेले बीते एक साल के हैं।

  • भोपाल संभाग: राजधानी भोपाल (2333) के बाद विदिशा (1550) और रायसेन (1412) में सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।


सरकार का सख्त रुख

मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि आत्महत्या के इन मामलों में पुलिस केवल मर्ग कायम नहीं कर रही, बल्कि जहां भी ‘उकसाने’ (Abetment to Suicide) के सबूत मिल रहे हैं, वहां आरोपियों के खिलाफ एफआइआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

हेल्पलाइन नोट: यदि आप या आपके जान-पहचान में कोई तनाव में है, तो कृपया मदद मांगें। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों या स्थानीय हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।

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