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सुबह एफडी पेश कर जमानत करवाई, दोपहर में तुड़वाकर राशि ले ली

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नशे के कारोबारियों द्वारा न्याय व्यवस्था के साथ धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिला कोर्ट में जमानत पाने के लिए आरोपित ने 50 हजार रुपये की सावधि जमा (FD) पेश की, लेकिन उसी दिन चालाकी से बैंक से राशि वापस निकाल ली। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल जमानत निरस्त की है, बल्कि धोखाधड़ी करने वाले जमानतदार के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
अपर लोक अभियोजक श्याम दांगी के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने अप्रैल 2025 में खजराना क्षेत्र से अरबाज उर्फ अब्बू को 17.17 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ पकड़ा था। जांच की कड़ी रतलाम के जावरा निवासी मोहसिन पुत्र एजाज मेव तक पहुँची। मोहसिन ने जिला कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने 50 हजार रुपये की जमानत राशि पर स्वीकार कर लिया था।

शातिर तरीके से की गई धोखाधड़ी
मोहसिन की ओर से जाकिर हुसैन नामक व्यक्ति ने जमानतदार बनते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की 50 हजार रुपये की एफडी कोर्ट में प्रस्तुत की। यह एफडी 20 जनवरी 2026 को बनाई गई थी। कोर्ट ने इसी आधार पर मोहसिन को रिहा करने के आदेश दे दिए।

धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब कोर्ट ने बैंक को औपचारिक पत्र भेजकर निर्देश दिया कि इस एफडी की राशि कोर्ट की अनुमति के बिना जारी न की जाए। बैंक ने जवाब में बताया कि जाकिर हुसैन ने एफडी बनवाने के कुछ ही घंटों के भीतर उसी दिन सारा पैसा वापस निकाल लिया था।

कोर्ट की सख्त कार्रवाई
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जब यह सच सामने आया, तो कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया:

जमानत निरस्त: आरोपित मोहसिन की जमानत तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई है।

गिरफ्तारी वारंट: कोर्ट ने मोहसिन के खिलाफ नया गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

पुलिस को निर्देश: जाकिर हुसैन के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज करने के लिए एमजी रोड पुलिस थाने को निर्देशित किया गया है।

संदिग्ध पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड
जांच में यह भी सामने आया है कि जमानतदार जाकिर हुसैन ने अपना पता ’44 बाणगंगा कब्रिस्तान’ लिखवाया है, जो संदेह के घेरे में है। वहीं, जिस आरोपित मोहसिन की उसने जमानत ली थी, उस पर पहले से ही 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

अहम जानकारी: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस तरह की धोखाधड़ी के पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है जो कोर्ट में फर्जी दस्तावेज और एफडी पेश कर अपराधियों को बाहर निकालने में मदद करता है।

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