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MP में पहली बार ‘डिजिटल अरेस्ट’ में सजा, पुलिस बनकर 44 लाख की ठगी करने वाले को 3 साल की जेल

MP में ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर बड़ी चोट: 44 लाख की ठगी करने वाला पहुंचा सलाखों के पीछे, एमपी में पहली बार मिली ऐसी सजा

भोपाल | 1 मार्च, 2026 रिपोर्ट: अग्रसर इंडिया

मध्य प्रदेश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए मासूम लोगों को शिकार बनाने वाले साइबर ठगों के लिए एक बड़ा सबक सामने आया है। प्रदेश के न्यायिक इतिहास में पहली बार किसी साइबर अपराधी को डिजिटल अरेस्ट के मामले में जेल की सजा सुनाई गई है। भोपाल की एक महिला व्यापारी से 44 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को कोर्ट ने शनिवार को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

क्या है पूरा मामला?

मामला भोपाल के श्यामला हिल्स इलाके का है, जहां एक महिला व्यापारी को ठगों ने अपने जाल में फंसाया था। 30 सितंबर 2024 को पीड़िता ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी। ठगों ने खुद को साइबर पुलिस अधिकारी बताकर महिला को वॉट्सऐप कॉल किया और कहा कि उनके नंबर से अवैध गतिविधियां हो रही हैं और उनके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है।

साजिश: डराया, धमकाया और किया ‘डिजिटल अरेस्ट’

ठगों ने महिला पर इतना मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया कि वह घर से बाहर निकलने या किसी को फोन करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। उसे घंटों वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया। जेल जाने का डर दिखाकर ठगों ने किस्तों में महिला से 44 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

अजमेर से पकड़ा गया ‘म्यूल अकाउंट’ होल्डर

जब क्राइम ब्रांच ने मामले की तहकीकात शुरू की, तो कड़ियां राजस्थान के अजमेर से जुड़ीं। ठगी के 44 लाख में से 36 लाख रुपये दिनेश खिंची नाम के युवक के खाते में पहुंचे थे। 25 फरवरी 2025 को पुलिस ने आरोपी को अजमेर के किशनगढ़ से धर दबोचा। ताज्जुब की बात यह है कि आरोपी वहां एक भेड़ फार्म चलाता था और ‘म्यूल अकाउंट’ (पैसों की हेराफेरी के लिए इस्तेमाल होने वाला खाता) मुहैया कराता था।

कोर्ट का कड़ा फैसला

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कपिल बौरासी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिनेश खिंची को दोषी करार दिया। कोर्ट ने आरोपी को:

  • 3 साल का कठोर कारावास

  • 25 हजार रुपये का अर्थदंड

की सजा सुनाई। अभियोजन अधिकारी कविता यादव के मुताबिक, यह प्रदेश का पहला ऐसा मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के आरोपी को सजा के अंजाम तक पहुंचाया गया है।


सावधान रहें: कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस आपको फोन या वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं कर सकती। ऐसे कॉल आने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

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