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MP में राजनीति का नया दौर, अब नई पीढ़ी के हाथ में कांग्रेस की कमान; BJP में भी प्रभावी हुए नए चेहरे

 

भोपाल। मध्य प्रदेश में संगठन सृजन अभियान के बाद कांग्रेस (MP Politics) में नेतृत्व का बड़ा बदलाव दिखाई देने लगा है। इस अभियान के बाद प्रदेश की कांग्रेस (Congress) अब काफी हद तक नई पीढ़ी के नेताओं के हाथों में आ गई है।

करीब 40-45 वर्ष बाद पार्टी ने प्रदेश स्तर पर नेतृत्व में पीढ़ी परिवर्तन की जो पहल की थी, उसका असर अब संगठन और नेतृत्व दोनों में स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है।

विधानसभा चुनाव 2023 के बाद बड़ा बदलाव

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने संगठन में महत्वपूर्ण परिवर्तन करते हुए कमल नाथ को प्रदेश नेतृत्व से हटाकर युवा नेता जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दी थी। इसी के साथ पार्टी ने आदिवासी नेता उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी।

 

अब जीतू पटवारी और उमंग सिंघार की यह नई जोड़ी प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और पार्टी को पुनर्जीवित करने के प्रयास में जुटी हुई है। पार्टी के भीतर इसे नेतृत्व परिवर्तन की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन सृजन अभियान में उम्र सीमा तय

कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के तहत संगठन में व्यापक बदलाव किए हैं। पार्टी ने इस अभियान के दौरान पदाधिकारियों के लिए उम्र सीमा 50 वर्ष से कम तय की थी।

इसके अनुसार संगठन के सभी स्तरों ब्लॉक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर लगभग आधे पदाधिकारियों की नियुक्ति 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं में से की गई है। इसके अलावा नई व्यवस्था के तहत किसी भी व्यक्ति को एक पद पर पांच वर्ष से अधिक नहीं रखा जाएगा, ताकि संगठन में लगातार नए नेताओं को अवसर मिल सके।

जीतू पटवारी और उमंग सिंघार इसका उदाहरण

कांग्रेस की नई नीति का असर प्रदेश नेतृत्व में भी दिखाई देता है। जीतू पटवारी और उमंग सिंघार दोनों को लगभग 50 वर्ष की उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। वर्तमान में दोनों नेता 52 वर्ष के होने वाले हैं। यह बदलाव कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहती है।

BJP में भी नई पीढ़ी का नेतृत्व

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भा में भी नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है। वर्तमान में मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में हेमंत खंडेलवाल दोनों ही अपेक्षाकृत नई पीढ़ी के नेताओं में गिने जाते हैं।

यदि दोनों दलों में नेतृत्व परिवर्तन की तुलना की जाए तो भाजपा में यह बदलाव अपेक्षाकृत आसानी से स्वीकार किया गया, जबकि कांग्रेस में शुरुआत में कुछ हिचक देखने को मिली। हालांकि अब पार्टी का पुराना नेतृत्व भी नए नेतृत्व के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहा है।

भाजपा की पुरानी पीढ़ी का लंबा दौर

दरअसल, 1985-90 के दौर में भाजपा के तत्कालीन नेतृत्व ने जिस पीढ़ी को आगे बढ़ाया था, वही लंबे समय तक मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रही। उस समय शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, नरोत्तम मिश्रा और जयंत मलैया जैसे नेताओं को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उतारा गया था।

वर्ष 2023 में करीब 34 वर्ष बाद ऐसा मौका आया जब भाजपा ने नया नेतृत्व सामने लाते हुए डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया। अब पार्टी के भीतर यह चर्चा भी होने लगी है कि आने वाले समय में धीरे-धीरे वरिष्ठ नेताओं को मुख्यधारा से अलग कर नई पीढ़ी को अधिक अवसर दिए जाएंगे।

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