भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और पीएचसी (PHC) में हर साल करीब 7 करोड़ मरीजों को मुफ्त दवाएं बांटी जाती हैं। लेकिन हालिया रिपोर्टों ने वितरण व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इट्राकोनाजोल, सेफेक्सिम और पैरासिटामोल जैसी महत्वपूर्ण दवाएं सरकारी लैब की जांच में अमानक पाई गई हैं, जबकि निजी लैब ने इन्हें सही बताया था।
प्रमुख बिंदु (HighLights):
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जांच में विरोधाभास: निजी लैब में 3 बार पास होने वाली दवाएं, सरकारी लैब (जैसे कोलकाता) में चौथी बार में फेल हो रही हैं।
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प्रभावित दवाएं: एंटीबायोटिक, फंगल रोधी और बुखार की सामान्य दवाएं (पैरासिटामोल) भी घेरे में हैं।
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ढीली कार्रवाई: अमानक दवा मिलने पर कंपनियों को केवल 2 साल के लिए प्रतिबंधित किया जाता है; ब्लैकलिस्ट की प्रक्रिया काफी जटिल है।
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वितरण की खामी: कई बार रिपोर्ट आने तक आधे से ज्यादा बैच मरीजों को बांटा जा चुका होता है।
दवाओं की 4 स्तरीय ‘सुरक्षा दीवार’ और उसकी विफलता
ड्रग एवं कॉस्मेटिक एक्ट के तहत दवाओं को मरीजों तक पहुँचने से पहले कड़े मापदंडों से गुजरना पड़ता है:
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प्रथम स्तर (Self-Lab): कंपनी खुद अपनी लैब में दवा की जांच करती है।
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द्वितीय स्तर (NABL Lab): कंपनी को किसी मान्यता प्राप्त नेशनल लैब से मानक रिपोर्ट लेनी होती है। (इन दोनों रिपोर्ट के बिना सॉफ्टवेयर में एंट्री नहीं होती)।
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तृतीय स्तर (Hospital Level): जिस अस्पताल में पहला बैच पहुँचता है, वह तीसरी जांच कराता है।
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चतुर्थ स्तर (Surprise Check): सीएमएचओ या सिविल सर्जन औचक रूप से सैंपल लेकर केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (कोलकाता) या राज्य की लैब में भेजते हैं।
विवाद का केंद्र: पहले तीन स्तरों पर ‘Standard’ मिलने वाली दवाएं चौथे स्तर पर ‘Substandard’ क्यों हो रही हैं? अधिकारियों का तर्क है कि परिवहन (Transport) और रखरखाव (Storage) के दौरान पड़ने वाली गर्मी या नमी से गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अमानक मिली मुख्य दवाएं और उनके खतरे
| दवा/उपकरण का नाम | प्रमुख उपयोग | संभावित खतरा |
| इट्राकोनाजोल (Itraconazole) | फंगल इन्फेक्शन के लिए | इन्फेक्शन का न रुकना |
| सेफेक्सिम / अमिकासिन | गंभीर एंटीबायोटिक | एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस |
| ईथमसाइलेट (Etamsylate) | ब्लीडिंग रोकने के लिए | इमरजेंसी में जान का जोखिम |
| ब्लड ग्रुपिंग किट | ब्लड ग्रुप की जांच | गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन का खतरा |
व्यवस्था में सुधार की तैयारी
मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन के एमडी मयंक अग्रवाल के अनुसार, गुणवत्ता में आने वाले मामूली अंतर को खत्म करने के लिए संभाग स्तर पर आधुनिक वेयरहाउस बनाए जा रहे हैं। इससे दवाओं के परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
निष्कर्ष: मरीजों की सेहत से खिलवाड़?
दवाओं का अमानक मिलना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। जब तक दवा की फाइनल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक उसके वितरण पर रोक लगाने की तकनीक को और भी सख्त बनाने की जरूरत है।




