भोपाल। नगर निगम के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में भले ही संपत्ति कर की दरों में सीधे तौर पर कोई वृद्धि नहीं की गई हो, लेकिन एक तकनीकी बदलाव के कारण शहर के हजारों लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने वाला है। दरअसल, निगम प्रशासन ने शहर की लगभग 150 कॉलोनियों के परिक्षेत्र में बदलाव किया है, जिसका असर 85 में से 53 वार्डों के निवासियों पर पड़ेगा।
नगर निगम का नया बजट कागजों पर कर वृद्धि से मुक्त दिखाई दे रहा है, लेकिन कॉलोनियों के परिक्षेत्र में बदलाव किए जाने से जमीनी स्तर पर शहर के कई इलाकों में आमजन की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
निगम प्रशासन ने यह बदलाव कॉलोनियों की भौगोलिक स्थिति और वहां हुए विकास को आधार बनाकर किया है, जिन इलाकों को अब तक ‘पिछड़ा’ या ‘झुग्गी बाहुल्य’ मानते हुए कम दरों पर संपत्ति कर लिया जाता था, उन्हें अब ‘सामान्य’ या ‘विकसित’ श्रेणी में शामिल कर दिया गया है।
इस श्रेणी परिवर्तन के कारण संबंधित क्षेत्रों में कर की दरें स्वतः बढ़ जाएंगी, इसके चलते इन 53 वार्डों के निवासियों को अब पहले के मुकाबले अधिक संपत्ति कर का भुगतान करना होगा।
परिक्षेत्र आठ में सिर्फ गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्रपरिक्षेत्र क्रमांक आठ में सिर्फ औद्योगिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यही वजह है कि इसमें वार्ड क्रमांक 65 में औद्योगिक क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाईयां, कुटीर, लघु उद्योग, जो रेखांकित क्षेत्र में उन्हें पूर्व की भांति औद्योगिक परिक्षेत्र में शामिल रखा गया है। वहीं, वार्ड क्रमांक 74 में कोलुआ कला औद्योगिक क्षेत्र गोविंदपुरा भी परिक्षेत्र आठ में शामिल रहेगा।यहां अभी भी विसंगतियांअरेरा कालोनी, मीनाल रेसीडेंसी जैसी शहर की पॉश कॉलोनियों को निगम ने परिक्षेत्र क्रमांक चार में रखा हुआ है।
वहीं, वार्ड क्रमांक तीन में सीहोर नाका पुराना से ग्राम कोलूखेड़ी आगे बायपास रोड तक, भोपाल-सीहोर मुख्य मार्ग इससे पहले तक परिक्षेत्र क्रमांक पांच में शामिल था, जिसे अब परिक्षेत्र क्रमांक छह में शामिल कर दिया है। दूसरी ओर अरेरा कालोनी और मीनाल रेसीडेंसी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी तरह वार्ड क्रमांक 26 के केरवा डेम रोड, व्हिस्प्रिंग पाम्स, एमआइएम कालोनी, पारस वाटिका गोल्डन सिटी, तिरूपति नगर अभी परिक्षेत्र क्रमांक चार में शामिल हैं।




