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भोपाल में चयनित शिक्षकों का ‘हल्लाबोल’: 8 महीने बाद भी जॉइनिंग नहीं, नए सत्र में अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में बुधवार को चयनित शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती (2022) के खेल, गायन, वादन और नृत्य विषयों के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर सरकार और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

दस्तावेज सत्यापन के बाद भी नियुक्ति अधर में

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि 25 सितंबर को भर्ती का रिजल्ट जारी कर दिया गया था और दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। नियमानुसार, सत्यापन के तीन महीने के भीतर जॉइनिंग मिल जानी चाहिए थी, लेकिन सात महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग ने न तो कोई शेड्यूल जारी किया है और न ही नियुक्ति की तारीख बताई है।

नया शैक्षणिक सत्र और अतिथि शिक्षकों की भर्ती पर सवाल

1 अप्रैल से राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि:

  • एक तरफ चयनित शिक्षक सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में अतिथि शिक्षकों (Guest Faculty) की भर्ती की जा रही है।

  • दो-दो कठिन परीक्षाएं पास करने के बाद भी योग्य उम्मीदवारों को स्कूलों से दूर रखा जा रहा है।

  • विभाग के चक्कर काटने पर अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब देने के बजाय कई बार अपमानजनक व्यवहार किया जाता है।

मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना

प्रदर्शन में शामिल महिला अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि लंबे समय से जॉइनिंग न मिलने के कारण वे मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही हैं। मेरिट लिस्ट में नाम आने के बावजूद बेरोजगारी का ठप्पा न हटने से परिवार और समाज के सामने जवाब देना मुश्किल हो रहा है।

“सत्र 2021-22 में भर्ती का विज्ञापन निकला था। प्री और मुख्य परीक्षा पास करने के बाद साल 2025-26 में वेरिफिकेशन हुआ, लेकिन अब तक स्कूल आवंटन का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।” — नर्मदापुरम की एक अभ्यर्थी

चयनित शिक्षकों की मुख्य माँगें:

  • तत्काल नियुक्ति पत्र: विभाग जल्द से जल्द चयनित शिक्षकों के नियुक्ति आदेश जारी करे।

  • स्कूल आवंटन: नए सत्र की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तुरंत स्कूल आवंटित किए जाएं।

  • स्पष्ट शेड्यूल: भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।

अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे।


ब्यूरो रिपोर्ट, भोपाल

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