भोपाल: राजधानी भोपाल में यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने और लंबी दूरी के सफर को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित 31.61 किलोमीटर लंबे फोर-लेन पश्चिम बायपास के संशोधित मार्ग (Alignment) को हरी झंडी मिल गई है। इस बायपास के बनने के बाद जबलपुर और बैतूल से इंदौर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रमुख विशेषताएँ और बजट
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कुल लागत: ₹3,225.51 करोड़।
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लंबाई: 31.61 किलोमीटर (फोर-लेन)।
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मार्ग: यह बायपास मंडीदीप-रतनपुर मार्ग से शुरू होकर कोलार-रातीबड़, फंदाकलां होते हुए भोपाल-देवास मार्ग पर फंदा तक जाएगा।
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मॉडल: यह प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर तैयार किया जा रहा है।
क्यों बदला गया रास्ता? (पर्यावरण और विरासत का संरक्षण)
शुरुआत में इस बायपास की लंबाई 40.90 किलोमीटर तय की गई थी, लेकिन निम्नलिखित कारणों से इसके एलाइनमेंट में बदलाव किया गया:
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रातापानी टाइगर रिजर्व: मार्ग का कुछ हिस्सा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आ रहा था।
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धार्मिक विरासत: मार्ग के बीच में प्राचीन समसगढ़ शिव मंदिर पड़ रहा था।
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बड़ा तालाब: तालाब के कैचमेंट एरिया और पर्यावरण विभाग की नई अधिसूचनाओं के कारण पुलों के प्रावधानों में तकनीकी बदलाव जरूरी थे।
जनता को क्या होगा फायदा?
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समय की बचत: जबलपुर-इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को शहर के ट्रैफिक सिग्नल और भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी।
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प्रदूषण में कमी: भारी वाहनों के शहर के बाहर से निकलने के कारण भोपाल शहर के भीतर वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आएगी।
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क्षेत्रीय विकास: कोलार और रातीबड़ जैसे क्षेत्रों के विकास को नई गति मिलेगी।
अन्य स्वीकृतियां
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की बैठक में केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के परिवर्तित एलाइनमेंट को भी मंजूरी दी गई है।




