भोपाल। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एक मंच पर होंगे। वे 11 से 13 अप्रैल तक रायसेन में होने जा रहे राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव में शामिल होंगे। महोत्सव का उद्घाटन राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव करेंगे, जबकि समापन 13 अप्रैल को नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भोपाल स्थित अपने आवास में रायसेन में होने वाले उन्नत कृषि महोत्सव की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि महोत्सव को हमने कर्मकांड नहीं, गंभीर प्रयास की तरह आयोजित किया है। उन्होंने कहा भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का फोकस दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके।
कहीं भी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंच जाना वरिष्ठ नेताओं के लिए शोभा नहीं देता
विपक्षी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज ने कहा कि खेती के लिए कोई काम करना चाहे तो करे, उसका स्वागत है। केवल राजनीति के लिए गंभीर कृषि मुद्दों पर हंगामा खड़ा करना उचित नहीं। बिना सूचना के कहीं भी अचानक ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंच जाना, खासकर वरिष्ठ नेताओं के लिए शोभा नहीं देता, यह अपरिपक्व राजनीति है। राजनीति गरिमा और तथ्यों के साथ होनी चाहिए।
वैश्विक हालात से कृषि निर्यात पर असर
शिवराज ने माना कि कई अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव एक्सपोर्ट पर पड़ता है। कहा कि ऐसे में सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले, फर्टिलाइजर की उपलब्धता बनी रहे और किसान पर वैश्विक संकट का बोझ न्यूनतम रहे। अब तक करीब तीन करोड़ ‘लखपति दीदी’ तैयार हो चुकी हैं और लक्ष्य है कि यह संख्या छह करोड़ तक पहुंचे। केवल एक बार आय बढ़ने को पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि हर महीने निगरानी करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि छह माह तक उनकी आय स्थिर रूप से ऊंची बनी रहे, तभी उन्हें ‘लखपति दीदी’ माना जाता है।
महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का संकल्प प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा और एनडीए का है। उन्होंने कहा कि 2029 के चुनाव इस प्रविधान के साथ कराने का लक्ष्य है और इसके लिए विशेष सत्र बुलाकर पूरी विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। बासमती चावल को जीआइ टैग के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि बासमती का मुद्दा भारत ही नहीं पाकिस्तान से भी जुड़ा है, कोर्ट में मामला विचाराधीन है।
किसानों की फार्मर आईडी बनाई, मप्र में बटाइदार किसान को खाद देने का माडल देशभर में करेंगे लागू
शिवराज ने कहा कि सब्सिडी वाला खाद कई बार दूसरे उद्योगों या गैर–कृषि उपयोग में डायवर्ट हो जाता है। इसे रोकने के लिए फार्मर आईडी आधारित मॉडल बनाया है, जिसके तहत हर किसान की जमीन, फसल और परिवार का डेटा एक एकीकृत आईडी से जुड़ा होगा। नौ करोड़ 29 लाख से अधिक फार्मर आईडी बन चुकी हैं, 13 करोड़ आईडी का लक्ष्य है।
जहां बटाई या पट्टे पर खेती की परंपरा है, वहां भूमि मालिक के लिखित प्रमाण के आधार पर बटाइदार किसान को भी खाद उपलब्ध कराने का मॉडल मध्य प्रदेश और हरियाणा में सफल रहा है, जिसे और परिष्कृत कर देशभर में लागू करने पर काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि खराब मौसम, वर्षा ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान का आकलन करने के निर्देश सभी राज्य सरकारों को दिए हैं। किसान को हरसंभव राहत और बीमा लाभ दिलाने में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।
छोटी जोत की चुनौती का समाधान है इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में औसत कृषि जोत लगभग 0.96 हेक्टेयर रह गई है। इतनी छोटी जोत में खेती को लाभकारी बनाना और आय बढ़ाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने याद दिलाया कि सहकारी खेती का प्रयोग पहले हुआ, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली, ऐसे में अब इंटीग्रेटेड फार्मिंग (समेकित कृषि प्रणाली) माडल पर काम करेंगे।
सरकार ने एक हेक्टेयर के माडल तैयार किए हैं, जिनमें किसान एक ही जमीन पर अनाज, फल, सब्जियां, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी जैसी एक से अधिक गतिविधियां एक साथ कर सकेगा। केवल अनाज पैदा करने से आय सीमित रहेगी, इसलिए कई गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आमदनी बढ़ाना उनका प्रमुख फोकस है।
शिवराज ने यह भी कहा
- पहले राष्ट्रीय स्तर की एक-दो बैठकों से बात आगे नहीं बढ़ पाती थी, इसलिए अब पूरे देश को पांच हिस्सों में बांटकर रीजनल कांफ्रेंस कर रहे।
- रिसर्च को लैब से लैंड तक ले जाएं, यानी विज्ञानिक और किसान सीधे जुड़ें, प्रयोग खेतों में हों और परिणाम किसानों तक पहुंचें।
- अब एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के आधार पर रोडमैप तैयार किए जाएंगे।
- रायसेन महोत्सव में सिहोर, विदिशा, रायसेन और देवास जिलों के लिए विशेष कृषि रोडमैप रखा जाएगा।
- कम से कम 18 लाख किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाने का लक्ष्य रखा था।




