भाजपा विधायक प्रीतम लोधी द्वारा करैरा एसडीओपी (IPS अधिकारी) डॉ. आयुष जाखड़ के विरुद्ध की गई टिप्पणी को लेकर अधिकारी-कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। …और पढ़ें
HighLights
- भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बिगड़े बोल
- करैरा SDOP को दी थी खुलेआम धमकी
- IPS एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति
भोपाल। शिवपुरी जिले के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी द्वारा करैरा एसडीओपी (आइपीएस अधिकारी) डॉ. आयुष जाखड़ के विरुद्ध की गई टिप्पणी को लेकर अधिकारी-कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। आइपीएस एसोसिएशन की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा गया है कि बहुप्रसारित वीडियो में विधायक ने जिस प्रकार अभद्र, अमर्यादित और धमकी भरी भाषा का प्रयोग किया है, वह अत्यंत निंदनीय और सार्वजनिक जीवन की गरिमा के विपरीत है।
विधायक की अमर्यादित टिप्पणी
दरअसल, विधायक इस वीडियो में कह रहे हैं- ‘एसडीओपी साहब, करैरा क्या तुम्हारे डैडी का है। वह (मेरा बेटा) करैरा आएगा भी और चुनाव भी लड़ेगा। तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना। अपनी औकात और कानून के दायरे में रहो। हमारा इतिहास भी देख लेना।’ बता दें कि विधायक के बेटे दिनेश लोधी ने गत 16 अप्रैल को अपनी थार गाड़ी से पांच राहगीरों को टक्कर मार दी थी। दिनेश से पुलिस पूछताछ के बाद विधायक का वीडियो सामने आया है।
IPS एसोसिएशन की कड़ी आपत्ति
कई अधिकारी-कर्मचारी संगठन और कांग्रेस ने भी विरोध दर्ज कराया है। आइपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष चंचल शेखर ने मीडिया को जारी बयान में कहा है कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण और भाषा को संयमित और मर्यादित रखें। धमकीपूर्ण व्यवहार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। संघ ने मामले में विधायक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारी संगठनों का विरोध
वहीं, मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने भी विधायक की अमर्यादित भाषा पर कड़ी आपत्ति की है। अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को इस तरह धमकाना बेहद निंदनीय और चिंतनीय है। इससे अधिकारियों का मनोबल गिरेगा और उनके अंदर निर्भीकता और निष्पक्षता से शासकीय दायित्व निभाने में हिचकिचाहट पैदा होगी। संघ ने इस कृत्य के लिए समुचित कार्रवाई की मांग की है। तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने भी विरोध दर्ज कराया है।
कानून को चुनौती दे रहे विधायक
उमंग सिंघार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि सत्ता का गुरूर इतना कि कानून को चुनौती और भाषा में मर्यादा शून्य। भाजपा के राज में “कानून का राज” है या “औकात दिखाने की प्रतियोगिता”? सिंघार ने प्रश्न किया कि क्या यह अपने ही सरकार की क्षमता पर सवाल है?
एक्सीडेंट के मामले में जो कार्रवाई बनती है की गई है। अब किसने क्या टिप्पणी की है इस संबंध में मैं कुछ नहीं कह पाऊंगा। जो पुलिस का काम है पुलिस कर रही है। अमन सिंह राठौड़, पुलिस अधीक्षक, शिवपुरी
एक्सीडेंट की कानूनी धारा तय होती है। एक्सीडेंट करने वाले की गाड़ी जब्त की गई और जमानत भी हो गई। निर्णय का अधिकार न्यायालय को होता है। पुलिस को सिर्फ अपना काम करना चाहिए। जिस तरह से पुलिस अपराधियों को रोड शो निकालती है। उसे निकालने का कोई अधिकारी नहीं है। पुलिस अधिकारी से अर्मादित भाषा में बात भी गलत है। – संजीव बिलगइयां, वरिष्ठ अधिवक्ता




