आसमान में उड़ते हुए हवाई जहाज में इंटरनेट मिलना किसी जादू से कम नहीं लगता, खासकर तब जब सुरक्षा कारणों से हमें ‘फ्लाइट मोड’ ऑन रखने की हिदायत दी जाती है। विमान में वाई-फाई कनेक्टिविटी के पीछे मुख्य रूप से दो आधुनिक प्रौद्योगिकियां काम करती हैं।
हवाई जहाज में इंटरनेट कैसे काम करता है, इसकी संक्षिप्त जानकारी यहाँ दी गई है:
कनेक्टिविटी के मुख्य तरीके
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एयर-टू-ग्राउंड (ATG) तकनीक: यह तकनीक जमीन पर लगे मोबाइल टावरों का उपयोग करती है। जैसे ही विमान आगे बढ़ता है, उसका एंटीना एक टावर से दूसरे टावर से जुड़ता जाता है, जिससे उड़ान के दौरान निरंतर नेटवर्क बना रहता है।
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सैटेलाइट टेक्नोलॉजी: समुद्र के ऊपर या ऐसे दुर्गम इलाकों में जहाँ मोबाइल टावर नहीं होते, वहाँ सैटेलाइट की मदद ली जाती है। विमान के ऊपर लगा एक विशेष एंटीना सीधे सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है, जिससे कितनी भी ऊँचाई पर इंटरनेट बाधित नहीं होता।
केबिन तक वाई-फाई का सफर
हवाई जहाज के एंटीना द्वारा प्राप्त सिग्नल को विमान के भीतर लगे एक इनबिल्ट राउटर तक भेजा जाता है। यह राउटर पूरे केबिन में वाई-फाई सिग्नल फैला देता है, जिससे यात्री अपने डिवाइस को कनेक्ट कर सकते हैं। यह प्रक्रिया ठीक वैसे ही काम करती है जैसे आपके घर या ऑफिस का वाई-फाई राउटर काम करता है।
निष्कर्ष
हजारों फीट की ऊँचाई पर हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराना आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी तकनीक की वजह से आज यात्री सफर के दौरान भी वीडियो देख सकते हैं, ऑफिस का काम कर सकते हैं और दुनिया से जुड़े रह सकते हैं।




