राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देशभर में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश इस दिशा में अभी भी कई राज्यों से …और पढ़ें

MP में डिजिटल शिक्षा की खुली पोल (AI Generated Image)
भोपाल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देशभर में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश इस दिशा में अभी भी कई राज्यों से काफी पीछे है। हाल ही में जारी नीति आयोग की ”स्कूल एजुकेशन सिस्टम इंडिया” रिपोर्ट में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं की कमजोर स्थिति उजागर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 तक प्रदेश के केवल 45.7 फीसद स्कूल ही इंटरनेट सुविधा से जुड़ पाए हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए गए थे। इसके बावजूद प्रदेश के स्कूलों में डिजिटल संसाधनों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2014-15 में मध्यप्रदेश के केवल 3.08 फीसद स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध थी। करीब दस वर्षों बाद भी यह आंकड़ा आधे स्कूलों तक ही पहुंच पाया है। शिक्षाविदों का मानना है कि इंटरनेट सुविधा की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई, स्मार्ट क्लास और तकनीकी शिक्षा पर पड़ रहा है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी डिजिटल संसाधनों से वंचित रह जाते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इंटरनेट सुविधा में दिल्ली और गुजरात से काफी पीछे
डिजिटल शिक्षा के मामले में मध्यप्रदेश की तुलना अन्य राज्यों से की जाए तो स्थिति और अधिक चिंताजनक दिखाई देती है। दिल्ली में 99 फीसद से अधिक स्कूल इंटरनेट सुविधा से जुड़े हुए हैं। वहीं गुजरात में 96.5 फीसद, केरल में 91.7 फीसद और पंजाब में 88.9 फीसद स्कूलों में इंटरनेट उपलब्ध है। इसके मुकाबले मध्यप्रदेश में आधे से भी कम स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी है।
40 फीसद स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा नहीं
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के करीब 40 फीसद सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में केवल 59.2 फीसद स्कूलों में ही कंप्यूटर मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां बड़ी संख्या में स्कूल अब भी बुनियादी डिजिटल संसाधनों से दूर हैं। कंप्यूटर सुविधा के मामले में लक्षद्वीप 100 फीसद के साथ देश में पहले स्थान पर है। वहीं दिल्ली 99.9 फीसद और पुडुचेरी 99.5 फीसद के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। इसके मुकाबले मध्यप्रदेश की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा परेशानी
प्रदेश के आदिवासी और दूरस्थ जिलों में डिजिटल शिक्षा की चुनौतियां अधिक गंभीर हैं। कई स्कूलों में बिजली और नेटवर्क की समस्या बनी हुई है, जिससे ऑनलाइन शिक्षा प्रभावित हो रही है। स्मार्ट क्लास और डिजिटल स्किल डेवलपमेंट जैसी योजनाओं का लाभ भी विद्यार्थियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है।
MP का आंकड़ा
- प्रदेश के सरकारी स्कूलों की संख्या – 1.22 लाख
- इतने सरकारी स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है – 10,800
- बिजली आपूर्ति नहीं है – 14,916
- कंप्यूटर नहीं है – 59,797
- इंटरनेट सुविधा नहीं है – 66,255
10 साल में इस तरह बढ़ी सुविधा
| सुविधाएं | 2014-15 | 2024-25 |
| बिजली आपूर्ति | 26.3 फीसद | 87.8 फीसद |
| कंप्यूटर सुविधा | 14.6 फीसद | 59.2 फीसद |
| इंटरनेट सुविधा | 3.8 फीसद | 45.7 फीसद |
| स्मार्ट क्लास | 5.2 फीसद | 19.6 फीसद |
यदि मध्य प्रदेश को डिजिटल शिक्षा में आगे बढ़ना है तो स्कूलों में इंटरनेट, कम्प्युटर लैब और तकनीकी संसाधनों का तेजी से विस्तार करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण देकर शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत है। – डॉ. दामोदर जैन, शिक्षाविद




