भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के बावजूद विद्यार्थियों की गणवेश यानि ‘युनिफॉर्म’ को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
स्कूल शिक्षा विभाग और शासन स्तर पर यह तय नहीं हो पाया है कि इस वर्ष विद्यार्थियों को सिली-सिलाई गणवेश उपलब्ध कराई जाएगी या फिर पहले की तरह उनके खातों में राशि भेजी जाएगी।
ऐसे में 16 जून से स्कूल खुलने पर लाखों छात्र-छात्राएं निर्धारित गणवेश के बजाय अलग-अलग रंगों के कपड़ों में स्कूल पहुंच सकते हैं। सबसे अधिक परेशानी नर्सरी और पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों को होगी, क्योंकि उनके पास पिछले वर्षों की गणवेश भी उपलब्ध नहीं है।
सिली हुई गणवेश देने की थी तैयारी
शासन के निर्देश पर इस वर्ष कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को सीधे तैयार गणवेश उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए विद्यार्थियों के खातों में राशि भेजने की व्यवस्था समाप्त करने पर विचार किया गया था।
हालांकि, गणवेश निर्माण और वितरण के लिए आवश्यक टेंडर प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में समय पर गणवेश उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
अब तक 600 रुपये मिलती रही राशि
वर्तमान व्यवस्था के तहत सरकार प्रत्येक विद्यार्थी को दो जोड़ी गणवेश खरीदने के लिए 600 रुपये सीधे बैंक खाते में भेजती रही है। लेकिन कई बार यह राशि भी सत्र के अंतिम चरण में पहुंचती थी, जिससे विद्यार्थियों को पूरे साल बिना गणवेश के पढ़ाई करनी पड़ती थी।
हर साल 390 करोड़ रुपये का खर्च
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक करीब 65 से 66 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। प्रत्येक विद्यार्थी पर औसतन 600 रुपये की गणवेश सहायता के आधार पर सरकार हर वर्ष लगभग 390 करोड़ रुपये खर्च करती है।
पहले भी विवादों में रही है व्यवस्था
गणवेश वितरण व्यवस्था पिछले कई वर्षों से चुनौतियों का सामना करती रही है।
– वर्ष 2020 में जिम्मेदारी स्व-सहायता समूहों को दी गई थी।
– समय पर गणवेश वितरण नहीं हो सका था।
– कोविड काल में शिक्षकों को घर-घर जाकर गणवेश पहुंचानी पड़ी थी।
– कई विद्यार्थियों को सही आकार की गणवेश नहीं मिल पाई थी।
– वर्ष 2023-24 और 2024-25 में भी वितरण प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।
इन्हीं समस्याओं के कारण सरकार ने राशि हस्तांतरण का विकल्प अपनाया था, लेकिन अब फिर से तैयार गणवेश वितरण व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
अभी तक इस संबंध में निर्णय नहीं लिया गया है कि तैयार गणवेश दिया जाएगा या राशि दी जाएगी। – हरजिंदर सिंह, संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र




